प्रकृृति से लगाव रखने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले कई लोग आज भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के बांदा के गोरेलाल तिवारी का नाम भी शामिल है, जो पिछले 23 वर्षों में 1000 से अधिक पौधे लगाकर इस वसुंधरा को हरा-भरा बनाने में जुटे हैं। उनकी खासियत है कि वह ज्यादातर पौधे फलदार लगाते हैं और उनकी तक तब तक देखभाल करते हैं। जब तक वह फल नहीं देने लगता है। पेड़-पौधों के प्रति अपना जीवन समर्पित करने वाले गोरेलाल को क्षेत्र के लोग वृक्षानंद कहकर पुकारते हैं। जिले के जसपुरा ब्लॉक तहसील पैलानी अंतर्गत ग्राम गौरी कला के निवासी गोरेलाल तिवारी पुत्र देवी चरण 81 वर्ष की उम्र होने के बाद भी उनके अंदर पौध लगाने का जज्बा अभी भी बरकरार है। पिछले 23 वर्षों में उन्होंने अपने क्षेत्र में 1000 से अधिक पौधे लगाए हैं। इनमें बरगद, पीपल, आम, जामुन, अमरूद, आंवला शामिल हैं। खासकर उन्हें फलदार पौधे लगाने का जुनून है। सबसे खास बात यह है कि पर्यावरण की दृष्टि से अति उत्तम इनके द्वारा लगाए गए 99 फीसदी पौधे जीवित हैं। बड़ी संख्या में उनके लगाए पेड़ फल दे रहे हैं।
बचपन से पौधे लगाने का जुनून : पेशे से किसान गोरेलाल तिवारी को बचपन से ही पौधे लगाने का जुनून है। वह जिस पौधे को लगाते हैं, तब तक देखभाल करते हैं, जब तक वह फल नहीं देने लगता है। उनके लगाए गए पेड़ों के फल खाकर लोग उन्हें याद करते हैं। इसी क्षेत्र के शिवम सिंह बताते हैं कि पेशे से किसान गोरेलाल द्वारा हर साल खेतों व खेतों की मेज पर फलदार पौधे लगाए जाते हैं। पौधे लगाने के बाद उसकी सेवा बच्चे की तरह करते हैं। यही वजह है कि उनके लगाए हुए पौधे सुरक्षित रहते हैं और उनके लगाए हुए सैकड़ों पे? फल दे रहे हैं। साथ ही राहगीरों को छाया दे रहे हैं। पौधा रोपित कर क्षेत्र को हरा-भरा बनाने वाले वृक्षानंद बाबा को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। इसबारे में वृक्षानंद गोरेलाल तिवारी बताते हैं कि पुरखों के लगाए पेड़ अगर फलदार हों और जब उन पेड़ों के फल हम खाते हैं तो हमें अपने पुरखों की याद आती है। फल खाने के बाद न सिर्फ हम गौरवान्वित होते हैं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृृतज्ञता भी महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली वस्तुओं में पेड़ों का बहुत महत्व है। जितने अधिक पेड़ होंगे पर्यावरण भी उतना ही शुद्ध होगा। आजकल लोगों को वायु प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। यदि हमें खुद को जिंदा रखना है तो सभी को मिलकर पौधे लगाने होंगे। पेड़ पौधे जीवनदायिनी ऑक्सीजन देते हैं। पेड़-पौधे के कमी से ऑक्सीजन की कमी होती चली जाएगी, जिससे जीना दूभर हो जाएगा।