आमतौर माना जाता है कि ऑस्ट्रेलिया की जितनी आबादी है, उतनी संख्या भारत की जनसंख्या में हर साल जुड़ जाती है। ऐसे में किसी कवि ने ठीक ही कहा है-वाह रे भारत, शाबास इंडिया, हर साल तू पैदा करता एक नया आस्टे्रलिया, कोई देश आगे है कल-करखाने लगाने में, कोई देश आगे है रॉकेट उड़ाने में तो अजी, मेरा देश भी आगे  है जनसंख्या बढ़ाने में। कवि ने ऐसा लिखकर भारत की जनसंख्या विस्फोट पर अपनी व्यंग्यात्मक चिंता जताई थी। इसी बीच खबर है कि आस्ट्रेलिया में भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आस्ट्रेलिया में बसना भारतीयों का शौक बन गया है। ऑस्ट्रेलिया की ताजा जनगणना के मुताबिक देश में 27 प्रतिशत से ज्यादा (27.6 फीसदी)लोग ऐसे हैं जिनका जन्म विदेशों में हुआ है। विदेश में जन्मे इन लोगों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है। भारत ने चीन और न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ दिया है और अब ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद तीसरे नंबर पर आ गया है। आस्ट्रेलिया की लगभग आधी आबादी (48.6 प्रतिशत) ऐसी है जिनके माता या पिता में से कम से कम कोई एक विदेश में जन्मा था। 2017 की जनगणना के बाद से देश में दस लाख से ज्यादा (10,20,007) आप्रवासी आकर बसे हैं। सबसे ज्यादा विदेशी आप्रवासी भारत से आए हैं। उनकी संख्या में 2,17,963 लोगों की वृद्धि हुई है। दूसरी सबसे ज्यादा वृद्धि नेपाली मूल के लोगों की संख्या में हुई है। ऑस्ट्रेलिया में नेपालियों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा (123.7 फीसदी) बढ़ी है और 2016 के बाद से 67,752 ज्यादा लोग नेपाल से आकर ऑस्ट्रेलिया में बस गए हैं। विदेशी मूल के लोगों की संख्या में सबसे पहला नंबर इंग्लिश मूल के लोगों का है, जिनकी आबादी 33 प्रतिशत है। उसके बाद ऑस्ट्रेलियाई (29.9 प्रतिशत), आयरिश (9.5 प्रतिशत), स्कॉटिश (8.6 प्रतिशत) और चीनी (5.5 प्रतिशत) मूल के लोगों का नंबर है। 2016 के बाद से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की आबादी में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस जनगणना के मुताबिक 2021 में 1 जून को देश में 6,73,352 लोग रह रहे थे जो कि 2016 की संख्या (4,55,389) से 47.86 प्रतिशत ज्यादा थे। अपने घरों में अंग्रेजी से इतर कोई और भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 7,92,062 बढ़ गई है और अब करीब 56 लाख से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनके घर में अंग्रेजी के अलावा कोई और भाषा बोली जाती है। लगभग साढ़े आठ लाख लोग तो ऐसे हैं जो अंग्रेजी बोल ही नहीं पाते हैं। गैर अंग्रेजी भाषाओं में पंजाबी टॉप-5 में शामिल है। सबसे ज्यादा गैर-अंग्रेजी भाषी लोग मैंडरिन (2.7 फीसदी) बोलते हैं। उसके बाद अरबी (1.4 प्रतिशत), वियतनामी (1.3 प्रतिशत), कैंटोनीज (1.2 प्रतिशत) और फिर पंजाबी (0.9 प्रतिशत) का नंबर है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हिंदुओं की संख्या टॉप 5 धर्मों के लोगों में शामिल है। देश की 2.7 प्रतिशत आबादी हिंदू है। लेकिन किसी धर्म को ना मानने वाले लोगों की संख्या 38.9 प्रतिशत है जो एक समूह के रूप में सबसे बड़ा है। दूसरे नंबर पर कैथलिक ईसाई हैं जिनकी आबादी 20 प्रतिशत है। एंग्लीकन 9.8 प्रतिशत हैं जबकि इस्लाम को मानने वालों की आबादी 3.2 प्रतिशत है। ताजा जनगणना के मुताबिक न्यू साउथ वेल्स अब देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है। वहां 31.8 प्रतिशत आबादी रहती है। लेकिन पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा आबादी देश की राजधानी कैनबरा की बढ़ी है, जहां अब 14 प्रतिशत लोग ज्यादा रहते हैं। सबसे ज्यादा शहरी लोग वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया राज्य में रहते हैं जहां की ग्रामीण आबादी सिर्फ  20 प्रतिशत है जबकि सबसे ज्यादा ग्रामीण आबादी तस्मानिया राज्य में रहती है। देश की 67 प्रतिशत आबादी राज्यों की राजधानियों यानी छह शहरों में ही रहती है जबकि बाकी देश में सिर्फ  33 फीसदी लोग रहते हैं। देश के 55 लाख परिवार जोड़ों के रूप में रहते हैं, जबकि दस लाख से ज्यादा एकल माता या पिता हैं। ऐसे जोड़ों की आबादी 26 लाख से ज्यादा हैं जिनके बच्चे नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया में 23,914 समलैंगिक शादीशुदा जोड़े गिने गए हैं, जबकि कुल शादीशुदा लोगों की संख्या 87.47 लाख है। 21.6 लाख लोग बिना शादी किए साथ रह रहे हैं, जबकि 1 जून 2021 को 78 लाख से ज्यादा लोगों का कोई पार्टनर नहीं था।