गर्मी के मौसम में अक्सर कीड़े, मच्छर परेशान करते हैं। अभी मानसून का मौसम दस्तक दे दी है। उसमें भी कीड़े, कॉकरोच जैसे कई जंतु बच्चों को खास कर काट लेते हैं। बच्चे अक्सर पार्क में खेलने जाते हैं लेकिन वहां से हाथों में रशेस या मच्छर के काटने का निशान लेकर ही आते हैं। बड़े बच्चे तो फिर भी अपनी देखभाल कर लेते हैं, लेकिन छोटे बच्चों की चिंता इस दौरान बढ़ जाती है। डेढ़-दो साल या उससे छोटी उम्र के बच्चे शरीर में काटे मच्छर या चींटी के बार में नहीं बता पाते। मच्छर के डंक से बचने के लिए यूं तो मार्केट में कई तरह के लोशन और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन छोटे बच्चे के लिए यह सुरक्षित है या नहीं, पेरेंट्स को इस बात का डाउट बना रहता है। अगर आपका बच्चा भी छोटा है तो उसे कई नेचुरल तरीकों से आप बचा सकते हैं। अगर कभी भी उन्हें कोई कीड़ा या मच्छर काटे तो आप उनके सतह इन नेचुरल तरीकों को अपना सकते हैं। इससे उनकी त्वचा सुरक्षित रहेगी और उन्हें कोई नुकसान भी नहीं होगा। किन तेल के इस्तेमाल से बच्चे को मिलेगा आराम?
रोजमेरी ऑयल : इसे गुलमेहंदी तेल के नाम से भी जाना जाता है। कीड़े या मच्छर काटने वाली जगह पर इस तेल को लगा दें। इससे बच्चे का दर्द कम होगा वह राहत महसूस करेगा। ध्यान रहे इन तेल को उनके शरीर में लगाने से पहले अपने स्किन पर जरूर लगा कर ट्राई करलें।
लैवेंडर ऑयल : अपनी खुशबू के लिए मशहूर लैवेंडर के फूल ही नहीं इसका तेल भी असरदार होता है। एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर लैवेंडर यह ऑयल दर्द और सूजन में आराम पहुंचाता है। ये तेल बच्चों को आराम देगा और दिमाग भी शांत रखेगा।
टी ट्री ऑयल : एंटी बैक्टीरियल गुणों के अलावा टी ट्री ऑयल में एंटी फंगल गुण होते हैं। यह तेल संक्रमण को बढऩे से रोकता है और खुजली से आराम दिलाने में असरदार साबित होता है।
कपूर का तेल : कपूर का तेल बच्चे को दर्द में आराम पहुंचाता है। जलन वाली जगह पर कुछ बूंद कपूर का तेल बच्चे के बेस ऑयल में मिलाएं, बच्चे का रोना कम होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चे को जब भी ऊपर बताए गए कोई ऑयल लगाएं, उसे हमेशा बच्चे के बेस ऑयल में मिलाकर ही लगाएं। इससे उनकी त्वचा को नुक्सान नहीं पहुंचेगा।