इंसान अपनी लाइफ में कई तरह की चीजें हर रोज देखता है। इन चीजों में जिनसे उसे कोई फायदा या नुकसान नहीं होता, उसे वो पूरी तरह इग्नोर कर देता है। उसे लगता है कि इस चीज से उसे क्या मतलब है। लेकिन ज्ञानी वही है जो हर चीज में सवाल करे और फिर उसका जवाब ढूंढने की कोशिश करे। चाहे महिला हो या पुरुष, आज के समय में हर कोई ही ट्रेंडी फैशन को फॉलो करने की कोशिश करता है। लेकिन कई बार फैशन की चीजों में कुछ ऐसी चीजें छिपी होती है जो आंखों के सामने तो होती हैं, लेकिन उसकी वजह हम नहीं जानते। जैसे शर्ट के कॉलर में लगे दो छोटे बटंस। जी हां, आज के समय में ज्यादातर ब्रांडेड शर्ट्स के कालर के ऊपर में दो छोटे-छोटे बटंस होते हैं। हम इन्हें देखते हैं और फैशन स्टेटमेंट समझ कर पहन भी लेते हैं। लेकिन ये जानने की कोशिश नहीं करते कि आखिर इसकी जरुरत क्या है? आज हम आपको इन्हीं बटंस की जरुरत के बारे में बताने जा रहे हैं। शर्ट्स के कॉलर के ऊपर लगे ये बटंस यूं ही नहीं होते। इनका एक खास पर्पस है। एक खास कारण से इन्हें कॉलर के ऊपर किनारे की तरफ लगाया जाता है। 

यहां से हुई शुरुआत : शर्ट्स के कॉलर में लगे इन दो छोटे बटंस को डाउन कॉलर कहते हैं। जैसा कि नाम बता रहा है डाउन कॉलर यानी वो चीज जो कॉलर को नीचे की तरफ रखने में मदद करता है। इस ट्रेंड की शुरुआत सबसे पहले घुड़सवारों के कपड़ों से हुई थी। इवी लीग के प्लेयर्स जो पोलो टीशर्ट्स पहनते थे उसके कॉलर में ये बटंस लगे होते थे। 

इस वजह से होता है इस्तेमाल : घुड़सवारों को घोड़े पर बैठ कर काफी स्पीड से दौड़ना पड़ता था। ऐसे में जब हवा का प्रेशर पड़ता था तो उनके टीशर्ट्स के कॉलर उनके चेहरे पर आए जाते थे। जिससे उनका ध्यान बंट जाता था। इसे रोकने के लिए टीशर्ट बनाने वाली कंपनियों ने कॉलर के नीचे की तरफ दो बटन डाल दिए। इससे बटन के भार से कॉलर हवा में नहीं उठ पाता था और घुड़सवार सेफ रहते थे। तब से शुरू हुआ फैशन में बदल गया है। लेकिन डाउन कॉलर वाले शर्ट या टीशर्ट पहनने वाले ज्यादातर लोग आज भी इससे अनजान है।