अगरतला : माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता माणिक सरकार ने त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार को भ्रष्टाचार का पर्याय बताते हुए शुक्रवार को कहा कि यदि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में वापसी करती है तो यह राज्य की जनता की एक बड़ी गलती साबित होगी। माणिक सरकार ने भाजपा के स्थानीय नेताओं पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के लाभार्थियों को अपने वेतन से कमीशन का भुगतान करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता माणिक सरकार ने कैलाशहर में संवाददाताओं से कहा कि मनरेगा कार्यों में मशीनों के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध के बावजूद हमें पता चला है कि ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में भारी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है। मनरेगा के एक लाभार्थी के दैनिक वेतन का आधा हिस्सा स्थानीय भाजपा नेताओं की जेब में जाता है जो मिट्टी खोदने के लिए मशीनी उपकरणों को लगाते हैं। भाजपा के नेता वेतन पाने वालों से कमीशन भी मांगते हैं। माकपा नेता ने उनाकोटी जिले में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत औसतन 20-25 मानव दिवस सृजित किए जाने का दावा करते हुए इस संबंध में जिलाधिकारी यू के चकमा को एक प्रतिवेदन भी सौंपा। मनरेगा का उद्देश्य एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की मजदूरी की गारंटी के साथ लोगों को रोजगार प्रदान करके देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना में भी गड़बड़ी होने का आरोप लगाया।त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अराजकता जैसी स्थिति व्याप्त है। अगर लोगों को लगता है कि मौजूदा सरकार को दूसरे कार्यकाल के लिए चुनने से उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, तो भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन उन्हें फिर से बेवकूफ बना देगा।
त्रिपुरा में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार का पर्याय : माणिक सरकार
