मालीगांव: सरकार ने पूर्वोत्तर में रेल संपर्क को बेहतर बनाने के लिए अपना भरपूर प्रयास किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र को पिछले आठ वर्षों (2014-2022) में रेलवे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है। 2014 और 2022 के बीच, कुल 893.82 किलोमीटर ट्रैक को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया है, 386.84 कि.मी. नई लाइनें बिछायी गयी, 356.41 कि.मी. लाइन का दोहरीकरण हुआ और 1578 कि.मी. नई लाइनों का सर्वेक्षण पूरा किया गया। रेलवे नेटवर्क पहले से ही असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश की राजधानियों को ब्रॉड गेज लाइनों से जुड़ा है। शेष राज्यों की राजधानियों को जोडऩे और क्षेत्र में रेल लाइन क्षमता बढ़ाने की दृष्टि से, पूर्वोत्तर राज्यों में 51,787 करोड़ रुपये की राशि का आवंटन किया गया है। पिछले आठ वर्षों में क्षेत्र के लिए प्रति वर्ष औसत निधि आवंटन 2009-14 की वार्षिक औसत निधि आवंटन से 254त्न अधिक है। ब्रॉड गेज रेलवे लाइन बिछाने का कार्य उर्ध्वमुखी वक्र की तरह दिखा है। 1641 किलोमीटर की 21 नई लाइन परियोजनाएं, 1209 किलोमीटर की 10 दोहरीकरण लाइन परियोजनाएं और 419.37 किलोमीटर की 06 नई लाइनों की राष्ट्रीय परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए क्षेत्र में 95,261.65 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। इन परियोजनाओं ने स्थानीय लोगों के लाभकारी रोजगार के लिए इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरी-पेशा का सृजन किया हैं और इस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को भी बदला है। 2018 में बोगीबील ब्रिज का चालू होना इस क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण था। इस सबसे लंबे रेल-सह-सडक़ पुल ने ऊपरी असम से दिल्ली की यात्रा की दूरी को 170 किमी कम कर दिया और ऊपरी असम में विशाल ब्रह्मपुत्र पर रेल संपर्क के लिए लंबे समय से रणनीतिक आवश्यकता को पूरा किया। मणिपुर, मिजोरम और मेघालय की राजधानियाँ 2023 तक ब्रॉड गेज से जुडऩे की उम्मीद है और नागालैंड राज्य की राजधानी कोहिमा के 2026 तक जुडऩे की उम्मीद है। नई लाइन और दोहरीकरण कार्यों के अलावा, क्षेत्र में रेल संरक्षा में भी वृद्धि के प्रयास किए गए हैं। पू. सी. रेल ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सभी मानव रहित समपार फाटकों को समाप्त कर दिया है। पूर्वोत्तर के 40 जोड़ी ट्रेनों में सुरक्षित, अधिक विश्वसनीय और अधिक आरामदायक एलएचबी कोच लगाए गए हैं। 257 स्टेशनों पर दिव्यांग शौचालय, 15 स्टेशनों में लिफ्ट और 9 स्टेशनों में एस्केलेटर उपलब्ध कराकर पिछले आठ वर्षों में रेलवे प्रणाली को यात्री अनुकूल बनाया गया है। इसके अलावा, सभी मनोनीत स्टेशनों पर निशुल्क हाई-स्पीड वाईफाई की सुविधा प्रदान की गयी है।
पूर्वोत्तर में रेलवे के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा
