भारत में कई स्मार्टफोन यूजर्स अपने परिवार और दोस्तों के साथ होने वाली बातचीत की प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई है। दरअसल, कई यूजर्स ने नोटिस किया कि उनकी सोशल मीडिया फीड पर फोन पर हुई बातचीत के आधार पर विज्ञापन दिखाई दे रहें। लोकल सर्किल कम्युनिटी के सर्वे के मुताबिक हर दूसरे भारतीय की प्राइवेट फोन कॉल ट्रैक हो रही है। ऐसा गुगल और फेसबुक यानी मेटा की एल्गोरिदम की वजह से हो रहा है। हाल ही में कम्यूनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार भारत में हर 2 में से 1 यूजर ने बातचीत के आधार पर अपनी फीड पर ऐड देखे। इस सर्वे में 8 हजार लोगों ने भाग लिया और इनमें से लगभग 53 प्रतिशत लोगों ने यह अनुभव किया। उनका कहना है कि वह लगभग 12 महीनों से इस तरह की ऐड देख रहे हैं।

माइक्रोफोन एक्सेस तक पहुंच : सर्वे से पता चलता है कि लगभग 9,000 में से 9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अपने सभी ऐप्स को माइक्रोफोन एक्सेस करने की अनुमति दी है। साथ ही 11 फीसदी उपयोगकर्ताओं ने ऑडियो और वीडियो कॉल के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए ऐप्स को माइक्रोफोन तक पहुंच प्रदान की है।

सोशल मीडिया साइट कर रहे कॉन्टेक्ट का इस्तेमाल : इस सर्वे में 84 प्रतिशत यूजर्स ने कहा कि व्हाट्सऐप उनके कॉन्टैक्ट को यूज कर रहा है। वहीं, 51 प्रतिशत का कहना है कि फेसबुक  और इंस्टाग्राम दोनों उनके कॉन्टैक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, 41 प्रतिशत यूजर्स का मानना है कि कॉलर आईडी ऐप उनके कॉन्टैक्ट का उपयोग कर रहा है।

कैसे करें बचाव : ऐसे में जब इन ऐड कंपनियों ने आपकी बातचीत तक अपनी पहुंच बना ली है, तो सवाल उठता है कि इससे कैसे बचाव किया जाए। इससे बचाने के लिए यूजर्स किसी भी ऐप को माइक्रोफोन और कैमरा के साथ-साथ कॉन्टैक्ट का एक्सेस न दें, और अगर किसी कारणवश देना पड़ जाए, तो यह एक्सेस केवल एक बार लिए ही दें। यह फीचर एंड्रायज 11 और उससे ऊपर के ऑपरेटिंग सिस्टम में उपलब्ध है।