नई दिल्ली : मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) चाहती है कि सरकार यात्री कारों के लिए छह एयरबैग को अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर फिर से विचार करे। कंपनी ने कहा कि ऐसा करने से छोटी कारों के बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, और आने वाले वक्त में वाहन क्षेत्र की नौकरियों पर भी इसका असर होगा। एमएसआई ने कहा कि इस फैसले से शुरुआती स्तर की कारों की बिक्री प्रभावित होगी, जहां कीमत काफी मायने रखती है। यह क्षेत्र पहले ही पिछले तीन वर्षों से बिक्री में कमी का सामना कर रहा है और ऐसे में दोपहिया उपयोगकर्ताओं के लिए छोटी कार खरीदना और भी मुश्किल हो जाएगा। सडक़ परिवहन मंत्रालय ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि इस साल अक्टूबर से कार विनिर्माताओं के लिए आठ यात्रियों तक क्षमता वाले मोटर वाहनों में कम-से-कम छह एयरबैग लगाना अनिवार्य कर दिया जाएगा। एमएसआई के अध्यक्ष आर सी भार्गव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बीएस-6 उत्सर्जन मानकों सहित विभिन्न नियामक मानदंडों के कारण शुरुआती स्तर की कारों की लागत काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही देश भर में छोटी कारों की बिक्री प्रभावित हुई है। छोटे शहरों में खासतौर से ऐसा देखने को मिला। उन्होंने सावधान किया कि छह एयरबैग का नियम लागू होने से कीमतें और बढ़ेंगी, जिससे देश में छोटी कार का बाजार और सिकुड़ जाएगा। भार्गव ने कहा, ‘‘तो, डर यह है कि इससे (छह एयरबैग) बाजार छोटा हो जाएगा। कार विनिर्माण क्षेत्र महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में रोजगार देता है। जब कार बाजार में बिकती है, तो कई नौकरियां पैदा करती है - ड्राइवर, रखरखाव, मरम्मत, कलपुर्जे आदि।’’ उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि पिछले तीन साल में हुआ, अगर कार बाजार आगे भी नहीं बढ़ता है, तो इसका रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह पूछे जाने पर कि एयरबैग के कारण कारों की कीमत कितनी बढ़ सकती है, भार्गव ने कहा कि मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता हूं, लेकिन यह 20,000-25,000 रुपये के बीच हो सकता है, जो एक छोटी कार खरीदार के लिए बड़ी राशि है।
छह एयरबैग अनिवार्य करने से छोटी कारों के बाजार पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव : मारुति
