जमशेदपुर प्रखंड की हुरलुंग पंचायत की मुखिया अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा की स्रोत हैं। पंचायत की मुखिया आशा देवी ने जल संरक्षण के लिए अनोखा तरीका अपनाकर एक मिसाल पेश की है। आशा देवी लगातार दो बार चुनाव जीतकर हुरलुंग पंचायत की मुखिया बनी हैं। अपने दो बार के कार्यकाल में उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में नाली का निर्माण नहीं कराया है। नालियों से बहकर नदी में मिलने वाले या अन्यत्र बेकार होने वाले बारिश और घर के पानी को संरक्षित कर रखने के लिए उन्होंने एक मुहिम शुरू की और लोगों को इसके लिए जागृत करने का काम किया। नाली बनवाने की मांग करने वालों से उन्होंने अपने घर के पानी को घर में रखने के लिए सोख्ता बनवाने की अपील की, ताकि जमीन की नमी बना रहे। उन्होंने लोगों को बताया कि भूमि का गिरता जलस्तर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में हम बेकार बह रहे पानी को सोख्ता के माध्यम से धरती के अंदर पहुंचाएंगे। इससे जलस्तर बढ़ेगा और भू-जल रिचार्ज होगा। जिससे भविष्य में क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। उनकी मुहिम ने रंग लाई और अब ग्रामीणों का मानना है कि जल संरक्षण करना सभी का कर्तव्य है। लोग अपने-अपने घरों में सोख्ता का निर्माण कर रहे हैं। पंचायत में आधे से अधिक घरों में लोगों ने सोख्ता का निर्माण कराया है। इसके साथ ही क्षेत्र में लगाए गए सरकारी चापाकलों के साथ ही सोख्ता का निर्माण कराया गया है, ताकि चापाकल का बेकार पानी का उपयोग धरती के साथ जलस्तर की धाराओं को नम रखा जा सके। नाली की बजाय हर घर में सोख्ता बनवाने के संबंध में मुखिया आशा देवी ने बताया कि पहले आसपास के क्षेत्रों में नाली का पानी सडक़ों पर बहते हुए देखती थी, सडक़ पर बहती नाली के पानी के कारण लड़ाई-झगड़ा होते देखा है। साफ-सफाई के अभाव में नालियों से बदबू आती थी। लड़ाई-झगड़ा देखकर सोचती थी, कि पानी को बहाने से लोगों में झगड़ा होता है। अगर लोग अपने घर का पानी अपने घर में ही जमा रखें, तो न झगड़ा होगा और न पानी बेकार में बहेगा। अब जब मौका मिला तो इसे अमलीजामा पहनाने का काम शुरू किया। नतीजा ऐसा रहा कि अब यहां हर तीसरे घर में सोख्ता बनाया गया है।