नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जीएसटी पर एक अहम फैसला देते हुए कहा कि जीएसटी काउंसिल की सिफारिशें मानना केंद्र और राज्यों के लिए जरूरी नहीं हैं। यानी जीएसटी काउंसिल जो भी सिफारिशें देता हैं, उन्हें लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार बाध्य नहीं होंगे। बल्कि ये सिफारिशें सलाह या परामर्श के तौर पर देखी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं के पास जीएसटी पर कानून बनाने का समान अधिकार है। जीएसटी काउंसिल इस पर उन्हें उपयुक्त सलाह देने के लिए है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्यों के पास जीएसटी पर कानून बनाने का एक बराबर अधिकार है। इसलिए जीएसटी काउंसिल को केंद्र और राज्यों के बीच व्यावहारिक समाधान प्राप्त करने के लिए सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम करना चाहिए। गुजरात हाईकोर्ट ने 2020 में रिवर्स चार्ज के तहत समुद्री माल इम्पोर्ट करने वालों पर जीएसटी लगाने के फैसले को रद्द कर दिया था। सरकार ने 5 प्रतिशत जीएसटी लगाने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसे गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। जीएसटी काउंसिल एक मुख्य फैसला लेने वाली एक संस्था है जो की जीएसटी कानून के तहत होने वाले कामों के संबंध में सभी जरूरी फैसले लेती है। जीएसटी काउंसिल की जिम्मेदारी पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक ही कर निर्धारित करना है। जीएसटी काउंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और राज्यों के वित्त मंत्री जीएसटी काउंसिल के सदस्य हैं। 1 जुलाई 2017 से जीएसटी कानून को पूरे देश में लागू किया गया था।
जीएसटी काउंसिल की सिफारिशें मानने के लिए केंद्र व राज्य सरकार बाध्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट
