गाय महत्वता को देखते हुए उसे माता की संज्ञा दी गई। हिम्मत नग निवासी भीमराज शर्मा ने गाय के गोबर की एक और खूबी सामने लाकर इस महत्वता को बढ़ाकर पर्यावरण सुरक्षा से जोड़ दिया है। भीमराज शर्मा ने गाय के गोबर से न केवल कागज बनाया बल्कि उस कागज में विभिन्न पौधों के बीज भी डाल दिए। जिससे उपयोग में लेने के बाद अगर कागज का कतरा भी मिट्टी के संपर्क में आया तो वहां पौधा उग जाएगा। उनका दावा है कि गोबर से कागज तैयार कर हजारों पेड़ों की कागज के लिए ली जाने वाली बलि को भी रोका जा सकता है। हिम्मत नगर टोंक रोड निवासी भीमराज शर्मा पेपर प्रिटिंग के कार्य ये जुड़े हुए है। वर्षों से वह ये कार्य करते आ रहे हैं। गौमाता के प्रति अटूट श्रद्धा से उनके मन में कुछ नया करने की इच्छा हुई। गुरु निरंजन भाई और पुत्री जागृति शर्मा की पहल से नवंबर 2016 में उन्होंने गाय के गोबर से पेपर तैयार करने की शुरुआत की। पेपर तैयार करने के लिए गौशाला से गोबर लिया और उसे गौमूत्र तथा कॉटन वेस्टेज से मिश्रित कर सीट तैयार कर दी। इस सीट को तैयार करने में न कैमिकल का उपयोग किया गया न ही ज्यादा पानी खराब हुआ। काम भी ऐसा की मशीनरी का उपयोग न के बराबर। गाय के गोबर से तैयार कागज की सीट में किसी भी प्रकार का कैमिकल नहीं है। यह गौमूत्र और पानी से तैयार होती है। इसको काम लेने के बाद अगर फेंक दिया जाता है तो यह कागज दो से तीन दिन में गल जाता है। साथ कैमिकल का उपयोग नहीं होने के कारण जमीन को उपजाऊ बनाता है।
12 तरह के बीज : शर्मा के यहां तैयार सीट में 12 तरह की वनस्पति के बीज होते है। ये हर मौसम के अनुकूल होते है और मिट्टी में मिलने और थोड़े से पानी के साथ ही पौध तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि गेंदा, तुलसी, राई, सरसों, मिर्च, टमाटर सहित 12 वनस्पति के बीज समाहित है। गोबर से बने कागज से शर्मा कैरी बैग,चूड़ी रखने का डिब्बा,ऑफिस केस, डायरी, शादी कार्ड,लिफाफा,कलेण्डर,फाइल कवर के साथ ही कई दैनिक उपयोग की चीजें। ये सब बाजार में मिलने वाले कागज के उत्पाद से कहीं कम नहीं।