गुवाहाटी : प्रतिबंधित संगठन अल्फा (स्वतंत्र) असम पुलिस के साथ साइबर लड़ाई में भी पीछे नहीं है। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का व्यवहार करके पुलिस विभाग की ओर से साइबर ड्रोम स्थापित करने के बावजूद अल्फा (स्वतंत्र) सोशल मीडिया पर अपना अस्तित्व कायम रखने के साथ-साथ प्रचार भी चला रहा है और फेसबुक के जरिए सदस्य भर्ती के लिए युवाओं को आकर्षित करने के लिए भी प्रयास कर रहा है। अल्फा (स्वतंत्र) ने सोशल मीडिया फेसबुक पर संगठन के नाम पर एक पेज खोलकर संगठन का प्रचार जारी रखे हुए है और इसके साथ ही कुशलता से सदस्य भर्ती भी कर रहा है। अल्फा (स्वतंत्र) के फेसबुक पेज के 3,100 फॉलोवर हैं। उक्त पेज पर अपलोड किया गया वीडिओ हजारों लोग देखते रहे हैं। हाल में अल्फा (स्वतंत्र) फेसबुक के जरिए ही अपनी विज्ञप्ति प्रकाशित करने लगा है और असम के विभिन्न त्योहारों के अवसर पर शुभकामना संदेश भी देते रहा है। इसके अलावा अल्फा (स्वतंत्र) ने पुलिस के जासूस होने के आरोप में मृत्युदंड देने से पहले दोनों आरोपी संजीव शर्मा और धनजीत दास के अंतिम बयान का वीडियो भी फेसबुक  पर अपलोड किया था। इसके बाद अनेक लोगों ने कॉमेंट में जय आई असम लिखकर अल्फा (स्वतंत्र) के उक्त कार्य का समर्थन किया था। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि अनेक युवा सार्वजनिक रूप से संगठन के उक्त पेज पर कॉमेंट करके संगठन में शामिल होने की अपनी इच्छा प्रकट करते हुए संपर्क करने के लिए अनुरोध भी किया था। इतना सब होने के बावजूद असम पुलिस चुप्पी साध रही है। पुलिस की तरफ से अल्फा में शामिल होने की इच्छा प्रकट करने वाले युवाओं की पहचान करके उनकी काउंसेङ्क्षलग की कोई व्यवस्था नहीं की गई। गौरतलब है कि असम पुलिस की विशेष शाखा हर पल अल्फा (स्वतंत्र) की क्रिया-कलापों पर दृष्टि रख रही है। इसके बावजूद एक प्रतिबंधित संगठन खुलेआम फेसबुक अकाउंट खोलकर प्रचार चला रहा है और पुलिस चुप बैठी है।  संदेह व्यक्त  है कि असम पुलिस पूर्वोत्तर के अन्यतम विद्रोही संगठन अल्फा (स्वतंत्र) को जिन्दा रखकर केंद्र सरकार से सोर्स मनी निकालने का फंदा बना रहा है।