रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यूरोप दौरा राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम् रहा। प्रधानमंत्री ने 2 मई से यूरोप के तीन देशों जर्मनी, डेनमार्क एवं फ्रांस का दौरा पूरा किया। मोदी की यात्रा जर्मनी से शुरू हुई तथा फ्रांस तक जाकर समाप्त हुई। जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्प के साथ द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच कुल नौ समझौते हुए। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के काम में जर्मनी भारत को आर्थिक सहायता देगा। जर्मनी के उद्यमियों ने भारत में पूंजी निवेश करने की दिलचस्पी भी दिखाई है। इसी तरह जर्मनी के बाद प्रधानमंत्री डेनमार्क पहुंचे जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकशन ने हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की। दोनों देशों के बीच हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, बंदरगाह, जहाजरानी सहित विभिन्न द्विपक्षीय मुद्धों पर बातचीत हुई। कार्बन उत्सर्जन के मुद्दे पर डेनमार्क ने अपने अनुभव से भारत को अवगत कराया। जर्मनी एवं डेनमार्क में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन को संबोधित कर अपना संदेश दिया। मोदी ने डेनमार्क में होने वाले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। इस सम्मेलन में डेनमार्क के अलावे स्वीडन, नार्वे, फिनलैंड एवं आइसलैंड के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया। इस मौके का लाभ उठाते हुए प्रधानमंत्री ने फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन, आइसलैंड के प्रधानमंत्री कैटरिन जैकब्सडॉटिर, नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर के साथ मोदी ने द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। अपने पड़ाव के अंतिम दौर में मोदी ने फ्रांस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भागेदारी, मेक इन इंडिया परियोजना, प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में चर्चा हुई। सभी का ध्यान मोदी की इस यात्रा की ओर लगा हुआ था कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में क्या विचार रखते हैं? इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की तटस्थता की नीति कायम रखा। यूरोप के विभिन्न मंचों से मोदी ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध तत्काल बंद होना चाहिए तथा समस्याओं का समाधान कूटनीतिक तरीके से किया जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है। मोदी ने जिन सात राष्ट्रों के प्रमुखों से बातचीत की वे सभी रूस के खिलाफ बयान दे रहे हैं एवं लगातार प्रतिबंध की घोषणा कर रहे हैं। इन सभी यूरोपीय देशों तथा रूस के बीच तनाव बना हुआ है। भारत का इन यूरोपीय देशों के साथ-साथ रूस के साथ भी अच्छा संबंध है। रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोपीय देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अमरीका यूक्रेन युद्ध को लंबा खींचना चाहता है, ताकि रूस कमजोर हो। यूरोपीय देश चाहते हैं कि भारत रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ बात करके युद्ध को रुकवाने के लिए प्रयास करे। इन देशों का मानना है कि मोदी और पुतिन के संबंध बहुत अच्छे हैं, ऐसे में पुतिन मोदी के सुझावों पर गौर कर सकते हैं। भारत का स्पष्ट मत है कि वह राष्ट्रहित के मामले पर कोई समझौता नहीं करेगा तथा रूस पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा। देखना है कि मोदी की वर्तमान यूरोप यात्रा से रूस-यूक्रेन युद्ध बंद करवाने का कोई फार्मूला निकलता है या नहीं।
मोदी का यूरोप दौरा
