नई दिल्ली : साल भर में डीजल, टोल और इंश्योरेंस जैसी लागत बढऩे से ट्रकों के मालभाड़े में 20फीसदी यानी 5 से 7 रुपए प्रति किमी का इजाफा हो गया है। देश में हाल में बड़ी चौतरफा महंगाई की एक बड़ी वजह है, क्योंकि फल-सब्जी से लेकर अनाज, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद तक सभी ट्रकों के जरिए ही ट्रांसपोर्ट होते हैं। ट्रकों की ऑपरेटिंग लागत में 65 से 70फीसदी खर्च डीजल का होता है। इसके अलावा, टोल टैक्स और इंश्योरेंस दूसरे प्रमुख खर्च हैं। इन तीनों में बीते साल भर में 25फीसदी तक इजाफा हुआ है। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (आइटवा) के मुताबिक, अगर डीजल में 1 रुपए का इजाफा होता है तो माल भाड़ा 50 से 60 पैसे बढ़ जाता है। सालभर पहले 10 पहिए के ट्रक की प्रति किलोमीटर लागत 32.81 रुपए थी और किराया प्रति किमी 34-35 रुपए था। अब लागत बढ़ गई है तो किराया भी लगभग 40-42 रुपए प्रति किलोमीटर हो गया है। पूरे देश में भाड़े की एक समान दर नहीं है। जहां से रिटर्न लोड नहीं मिलता वहां पर भाड़ा ज्यादा लगता है। आइटवा के प्रेसिडेंट महेंद्र आर्य ने बातचीत में कहा कि देश में महंगाई बढऩे की प्रमुख वजह ट्रकों का माल भाड़ा बढऩा भी है। डीजल और अन्य लागत बढऩे की वजह से भाड़ा बढ़ाना ट्रांसपोर्टर्स की मजबूरी है। सरकार से इस संबंध में हमारी बात हुई है, लेकिन सरकार डीजल की कीमतों में कोई समझौता नहीं करना चाहती। हमारी मांग है कि कम से कम डीजल की कीमतें रोज बढ़ाने के बजाय तिमाही आधार पर समीक्षा की जाए, ताकि हम भी ग्राहकों से तिमाही या सालाना आधार पर भाड़े को लेकर अनुबंध कर सकें। कोविड के बाद पिछले साल 70-75 फीसदी तक रिकवरी हुई थी, पर डीजल से एक बार फिर स्थिति बिगड़ गई है। कमोडिटी के दाम बढऩे और आम उपभोक्ता वस्तुओं की खपत कम होने से ट्रकों की डिमांड भी कम हो गई है।