मालीगांव : वर्ष 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए भारतीय रेल कड़ी मेहनत कर रही है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के प्रयास में पूर्वोत्तर सीमा रेल पूरे जोन में सौर ऊर्जा संयंत्रों को स्थापित कर अधिक से अधिक हरित ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कदम उठा रहा है। शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक कदम आगे बढ़ते हुए, मार्च, 2022 तक 4358.233 किलो वाट पीक (केडब्ल्यूपी) का उत्पादन करने वाले पूसी रेल में रूफ-टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों को चालू किया गया है। यह, बदले में, 44.54 लाख इकाइयों की बचत करेगी, जो ऊर्जा बिलों में सालाना लगभग 3.56 करोड़ रुपए है। पूसी रेल ने अपने ‘गो-ग्रीन’ मिशन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पिछले वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न स्टेशनों और अन्य सेवा भवनों में 585 किलोवाट सौर रूफ टॉप सिस्टम सफलतापूर्वक चालू किया गया। 585 केडब्ल्यूपी में से लामडिंग मंडल के अधीन 195 केडब्ल्यूपी क्षमता लामडिंग स्टेशन में, 100 केडब्ल्यूपी डिमापुर स्टेशन में और 120 केडब्ल्यूपी कामाख्या कोचिंग डिपो में शुरू की जा रही है। इसी प्रकार रंगिया मंडल के अंतर्गत रंगिया स्टेशन में 100 केडब्ल्यूपी क्षमता और विश्वनाथ चारआली स्टेशन एवं केन्द्रीय विद्यालय/रंगिया में 10-10 केडब्ल्यूपी क्षमता चालू की गई है। इसके अलावा, अलीपुरद्वार मंडल के दलगांव स्टेशन में 20 केडब्ल्यूपी क्षमता और कालचीनी स्टेशन, धुबड़ी स्टेशन एवं सालाकाटी स्टेशन में 10-10 केडब्ल्यूपी शुरू की जा रही है। चालू वित्त वर्ष में, ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, पूसी रेल अपने क्षेत्राधिकार में सौर रूफ-टाप प्रणालियों की 1500 केडब्ल्यूपी क्षमता को चालू करने के लिए तैयार है। इनमें लामडिंग मंडल के अधीन सिलचर स्टेशन में 100 केडब्ल्यूपी, गुवाहाटी स्टेशन और कामाख्या स्टेशन में 200-200 केडब्ल्यूपी शामिल हैं। इसके अलावा, न्यू बंगाईगाँव कारखाना में 1000 केडब्ल्यूपी शुरू करने की योजना है, जो पू.सी. रेल के अधीन एक प्रमुख कारखाना है। उस समय, जब यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं, पूसी रेल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने को प्रतिबद्ध है, जो सभी स्टेशनों की विद्युत आवश्यकता को पूरा करने में मदद करेगा और पर्यावरण के अनुकूल होने के अलावा रेल और देश के लिए बहुमूल्य खर्च को बचाएगा।