भारत अपनी रक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों पर आश्रित है। लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहल शुरू हुई है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विदेशी रक्षा कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने का मौका दिया जा रहा है। मोदी सरकार चरणबद्ध तरीके से तीनों सेनाओं के लिए हथियार एवं गोला-बारूद के लिए देश में ही सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कदम उठा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध की हालत को देखते हुए रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता ज्यादा महसूस होने लगी है। युद्ध के वक्त हथियार एवं गोला-बारूद की कमी होने पर दूसरे देशों की तरफ मुंह देखना पड़ता है। मुश्किल वक्त में दूसरे देश अपनी शर्तों पर हथियारों की आपूर्ति करने को तैयार होते हैं। खासकर चीन के साथ चल रही तनातनी के बीच भारत रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ताबड़तोड़ कदम उठा रहा है। इसका नतीजा भी दिखने लगा है। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 में रक्षा क्षेत्र की देशी कंपनियों से 64 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य तय किया था। खुशी की बात यह है कि देशी कंपनियों से लक्ष्य से ज्यादा 65.50 प्रतिशत खरीद हुई है। सरकार देशी के मार्ग में आ रही बाधा को दूर करने के लिए कदम उठा रही है तथा कंपनियां भी नई-नई तकनीक पर आगे बढऩे के लिए प्रयासरत हैं। 20 अप्रैल को ही डीआरडीओ से ने सुखोई-30 विमान से ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल नौसेना के जहाज को सटीक निशाना लगाने में सफल रही है। एक सप्ताह पहले भी सेना ने ब्रह्मोस-क्रूस मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। चीनी खतरे को देखते हुए डीआरडीओ लगातार नए-नए मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है। रूस के सहयोग से उत्तर प्रदेश में उन्नत राइफलों का निर्माण शुरू होगा जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। परियोजना-75 के तहत मझगांव डाकशिप बिल्डर्स में छह पनडुब्बियों का निर्माण पूरा हो गया है। 20 अप्रैल को अंतिम पनडुब्बी आईएनएस-वगशीर को समुद्र में उतार दिया गया है। इस पनडुब्बी में 40 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण लगाए गए हैं, जिसका एक वर्ष तक परीक्षण चलेगा। मालूम हो कि चीनी नौसेना के खतरे को देखते हुए भारत को भी अपनी नौसेना को मजबूत करनी होगी। चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी पैठ मजबूत करने लगा हुआ है। ऐसी स्थिति में भारत को भी मुकाबले के लिए तैयार होना पड़ेगा। चीनी युद्धपोतों पर नजर रखने के लिए भारत ने अमरीका से उन्नत विमान खरीदा है। अब भारत में भी खतरनाक ड्रोनों के निर्माण के लिए काम शुरू हो चुका है। डीआरडीओ ने भारत में ही मिसाइल डिफेंस सिस्टम का निर्माण किया है, ताकि बाहरी खतरे से देश को बचाया जा सके। आधुनिक युद्ध में हमला करने के लिए मिसाइल एक बड़ा माध्यम है। मिसाइल हमलों से बचने के लिए भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांच यूनिट को खरीदने के लिए करार किया है, जिसमें दो यूनिट मिल चुकी है। रूस के सहयोग से ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण भारत में हो रहा है। अब भारत चीन के पड़ोसी देश फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल देने के लिए करार किया है। युद्धक विमान को अपने देश बनाने का काम चल रहा है। तेजस का निर्माण हो चुका है, जबकि उसके अगले उन्नत किस्म के निर्माण पर काम चल रहा है। भारत पांचवीं पीढ़ी के युद्धक विमान के निर्माण में लगा हुआ है। चीन से मुकाबले के लिए रक्षा के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर होने बेहद जरूरी है। आत्मनिर्भर होने से विदेशी मुद्रा की भी काफी बचत होगी।
रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
