लॉस बनोसी (फिलिपीन्स) : रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते फर्टिलाइजर खासकर डीएपी के दाम बढऩे की वजह से भारत समेत पूरे एशिया में धान किसान इसका इस्तेमाल घटा रहे हैं। इसके चलते चावल के प्रोडक्शन में भारी कमी आने की आशंका है, जो दुनिया की आधी आबादी का मुख्य भोजन है। भारत से लेकर वियतनाम और फिलिपीन्स तक बीते एक साल में विभिन्न उर्वरकों (खाद) के भाव तीन गुना तक हो गए हैं। इसके चलते किसानों ने प्रोडक्शन बढ़ाने वाले इन केमिकल्स का इस्तेमाल कम कर दिया है। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टिट्यूट का आकलन है कि इसकी वजह से अगले सीजन में चावल का वैश्विक प्रोडक्शन 10फीसदी यानी 3.6 करोड़ टन तक घट सकता है। इतने चावल से 50 करोड़ लोगों का पेट भरा जा सकता है। इंस्टिट्यूट के सीनियर एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट हमनाथ भंडारी ने कहा कि प्रोडक्शन में कमी का यह आकलन कमतर है। यदि यूक्रेन में युद्ध जारी रहता है तो चावल के प्रोडक्शन में 10फीसदी से ज्यादा कमी आ सकती है। यह गंभीर मामला इसलिए है कि डिनर टेबल पर आने वाली हर थाली में खाद की बढ़ी भूमिका होती है।
इस साल 3.6 करोड़ टन घट सकता है चावल का ग्लोबल प्रोडक्शन
