प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा ने कांग्रेस छोडक़र तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया है। टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में बोरा टीएमसी में शामिल हुए। असम कांग्रेस में रिपुन बोरा एक जाना-माना चेहरा थे। वे पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा शिक्षा मंत्री के पद पर भी रह चुके हैं। उनके कांग्रेस छोडऩे से पार्टी को करारा झटका लगा है। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद बोरा को अध्यक्ष पद की कमान दी गई थी, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इसके लिए बोरा ने पार्टी की आंतरिक राजनीति एवं भीतरघात को जिम्मेवार ठहराया है। हाल ही में राज्यसभा के लिए हुए चुनाव में बोरा विपक्ष के उम्मीदवार थे, किंतु कांग्रेस और एआईयूडीएफ की आंतरिक राजनीति के कारण उनको हार का सामना करना पड़ा। प्रदेश कांग्रेस में कुछ वर्षों से गुटीय राजनीति चरम पर है। इसका नतीजा यह हुआ है कि रूपज्योति कुर्मी एवं सुशांत बुढ़ागोहाईं जैसे कांग्रेसी नेताओं ने अपने विधानसभा की सदस्यता को त्यागकर भाजपा का दामन थाम लिया। राज्यसभा चुनाव के वक्त रोहा के विधायक शशिकांत दास एवं करीमगंज के विधायक सिद्दीक अहमद ने खुलेआम भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देकर पार्टी को चौंका दिया। इन दोनों नेताओं को प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर दिया है। पांच राज्यों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पंजाब में आंतरिक कलह के कारण कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। इसका फायदा उठाते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब की सत्ता हथिया ली है। उत्तराखंड में भी कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, किंतु ऐसा नहीं हो पाया। गोवा एवं उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने काफी मेहनत की, किंतु उसको वोट में तब्दील नहीं करा सकी। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर विपक्ष का चेहरा बनने की कवायद में जुट गई हैं। यह तभी संभव है जब टीएमसी पश्चिम बंगाल से बाहर अपनी जड़ें मजबूत करे। इसी को ध्यान में रखकर टीएमसी पश्चिम बंगाल से बाहर अपनी पार्टी का विस्तार करने में जुट गई है। इससे पहले टीएमसी ने कांग्रेस की तेज-तर्रार नेता सुष्मिता देव को अपनी पार्टी में शामिल कर पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद बना दिया। रिपुन बोरा के टीएमसी में शामिल होने से असम एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में टीएमसी निश्चित रूप से मजबूत होगी। मेघालय में पहले ही टीएमसी ने मुकुल संगमा सहित सभी विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर दिया है। अब मेघालय में टीएमसी ही मुख्य विपक्षी दल बन गई है। त्रिपुरा में भी टीएमसी अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी हुई है। बदली परिस्थिति में कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है। अगर इसी तरह कांग्रेस की स्थिति रही तो आगे और चुनौती बढ़ सकती है।
असम कांग्रेस को झटका
