गुवाहाटी: अपराध पर अंकुश लगाने में विफल महानगर पुलिस की विफलता के नए-नए किस्से रोजाना सामने आ रहे हैं। न्यूज चैनेलों पर हो या सुबह के अखबारों पर, प्राय: हर रोज चोरी, डकैती, लूट, अपहरण, हत्या आदि जैसे आपराधिक खबरें सुर्खियों में रहती हैं। परंतु इन सबके बावजूद जैसे महानगर पुलिस कुंभकर्णी निद्रा में सो रही है। बढ़ती आपराधिक घटनाओं का खुलासा गत दिनों विधानसभा के वजट सत्र में देखने को मिला। विस के बजट सत्र के दौरान दिए गए आकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से 2022 के फरवरी तक चोरी के 23, 311 मामले,  बलात्कार के 379, अपहरण के 3,648, पॉकेटमारी के 114, हत्याकांड के 425, डकैती के 3,096 मामले सामने आए हैं। इसी के साथ-साथ 2011-2016 तक चोरी के 13,740 मामले,  बलात्कार के 417, अपहरण के 2,546, पॉकेटमारी के 91, हत्याकांड के 395, डकैती के 1,386 मामले दर्ज किए गए हैं। उक्त आकड़ों को देखते हुए आम नागरिकों ने गृह विभाग को संपूर्ण रूप से इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। नगरवासियों ने सरकार व प्रशासन के मौन रूप धारण करने को इस प्रकार के अपराध के लिए जिम्मेदार बताया है। वहीं इस संदर्भ में विशेष शाखा के पूर्व  पुलिस संचालक प्रधान पल्लव भट्टाचार्य ने बताया कि बढ़ते अपराध की तुलना में पुलिस की तकनीकी सुविधाओं में अब भी बहुत कमी है। उन्होंने बताया कि सरकार को कार्रवाई व कानूनी व्यवस्था को अलग करना होगा, जिससे कार्रवाई में  तेजी आएगी। वहीं मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में महानगर गुवाहाटी की सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कही गई थी, जिसके लिए 221 करोड़ रुपए सरकारी पूंजी से खर्च किए गए थे। परंतु यह केवल बातों में ही सीमित रह गया। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी में तब्दील होते गुवाहाटी महानगरी में अपराध को नियंत्रित करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी?