छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार की पेड़ों को बढ़ावा देने की योजना के अनुसार वृक्षारोपण कर हरियाली लाने की दिशा में वन मंत्री के निर्देश के अनुसार कोरबा वनमंडल ने रविवार को सीड बॉल्स पद्धति से वृक्षारोपण कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके लिए कोरबा विकासखंड के अंतर्गत गांव कुकरीचोली के दो छोटी पहाड़ियों के बीच की जगह को चयनित कर सीड बॉल्स रोपण और बीज का छिड़कांव किया गया। इसके साथ ही आम खाने के बाद फेंक दी जाने वाली गुठलियों को भी इकट्ठाकर रोपित किया गया। वृक्षारोपण कार्यक्रम में वन मंडलाधिकारी प्रियंका पांडेय शामिल रही। उन्होंने मीडिया को बताया कि लगभग 50 हजार सीड बॉल्स और 1500 किग्रा बीज छिडकांव का लक्ष्य रखा गया है जिसे बारिश के सीजन में किया जाना है। गौरतलब है कि खेती और वृक्षारोपण के लिए नित नए प्रयोग और नवाचार हो रहे हैं। इसी कड़ी में सीड-बॉल जैसी तकनीक भी काम में ली जाने लगी है। सीड बॉल्स के माध्यम से वृक्षारोपण में सबसे अच्छी बात यह है कि वृक्षारोपण के लिए विशेष परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती है। डीएफओ प्रियंका पांडेय ने इस तकनीक को लेकर बताया कि मिट्टी की बॉल के अंदर ही पौधे के बीज को रख दिया जाता है। बॉल जहां भी गिरती है वहां पर पौधा बन जाता है. कहा जाए तो बॉल जहां कही गिरेगी वहां होगा वृक्षारोपण। बारिश के मौसम से ठीक पहले ये सीड बॉल डालने से सीड बॉल मिट्टी के साथ घुल मिल जाते हैं और इसमें अंकुरण होने लगता है। कुछ समय बाद ये पौधा वृक्ष का रूप भी ले लेते हैं। इसी तरह बड़े खेतों के लिए उपयोगी इस तकनीक से खेत में जमीन खोदकर बुआई करने के स्थान पर दूर से सीड बॉल को फेंक पर भी बीज डाले जा सकते हैं। अमरीका में भी इस तकनीक का इस्तेमाल हुआ है और बड़े खेतों के साथ वनों में खूबसूरत फूलों वाले पौधों को लगाने के लिए इस तकनीक को काम में लिया जा रहा है।
पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा वृक्षारोपण