आज कल पर्यावरण संरक्षण के चर्चे तो बहुत होते हैं, लेकिन इस विषय के बारे में कोई भी गंभीरता से नहीं सोचता, और मानव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इस हद तक गिर जाता हैं, कि वो उन पेड़ों को भी काटने से नहीं चूकता जिनकी छावो तले उनका कभी बचपन गुजरा हो, या फिर उनका परिवार पला हो, हालांकि कुछ दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जो की इसके महत्व को समझते हैं, और इसका संरक्षण भी करते हैं, ऐसे ही एक परिवार ने भी ऐसा ही एक काम किया हैं, जिन्होंने पेड़ को ही अपना आशियाना बना लिया हैं, और दुनिया को चोंका दिया हैं! एम पी के जबलपुर परिवार ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया हैं, आपको बता दे, कि जबलपुर में एक केशरवानी परिवार ने पीपल के पेड़ को ही अपना घर बना लिया हैं, उन्होंने पेड़ की टहनी को बिना काटे 3 मंजिला ईमारत तैयार की हैं, और उन्होंने ऐसा करके पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया हैं, आपको बता दे, की उन्होंने पेड़ को बिना नुकसान पहुचाएं इतना बड़ा घर का निर्माण किया है! आपको बता दे, कि जिस पीपल के पेड़ पर केशरवानी करना परिवार ने अपना घर बनाया हैं, वह 125 साल पुराना पेड़ हैं, और इस परिवार की पूर्व पीढ़ी के लोगो ने इस पेड़ की छांव तले अपना बचपन जीया हैं, और बहुत सी यादें संजोई हैं! आपको बता दे, कि इस घर की नींव स्वर्गीय मोतीलाल केशरवानी ने रखी थी, और उनके परिवार के अनुसार वे इस पेड़ की छाओं मे पले बढ़े थे, और वे इस पेड़ को काटकर इसकी अहमियत नहीं खत्म करना चाहते थे, जिस वजह से उन्होंने बिना एक भी टहनी काटे ये घर का निर्माण बनवाया! आपको बता दे, कि घर के निर्माण कार्य में शुरू में बहुत सी दिक्कतें आई, इसलिए उन्होंने इंजीनियर को बुलाकर इसका निर्माण करवाया, और पेड़ को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए इंजीनियर की सहायता से घर का डिजाइन तैयार करवाया ! आपको बता दे, कि केशरवानी परिवार की इस पेड़ के साथ बहुत सी पुरानी यादें जुड़ी हैं, जिस कारण से ये सभी इस पेड़ को अपने परिवार का सदस्य जैसा मानते हैं, और उसकी पूजा भी करते हैं, क्योकि ऐसा माना जाता हैं , कि पीपल के पेड़ में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता हैं, और ये पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता हैं, खैर जो भी हो इस परिवार ने न सिर्फ एक नया और अनोखा काम किया हैं, बल्कि पर्यावरण बचाव का एक संदेश भी दिया हैं!
पेड़ को ही बना डाला आशियाना