नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल के दाम जिस तेजी के साथ बढ़ रहे हैं उस पर आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपइया कहावत बिल्कुल सही बैठती है। दरअसल, पिछले 3 साल में आम आदमी की कमाई जहां घटी है वहीं पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से सरकार से करोड़ो की कमाई की है। आज जब आप 100 रुपए का पेट्रोल डलवाते हैं तो इसमें से 52 रुपए टैक्स के रूप में सरकार की जेब में जाता है। इससे आम लोगों की जेब खाली हुई, वहीं, सरकार का खजाना तेजी से भरता गया। ऐसे में अगर सरकार चाहे तो टैक्स में कटौती करके आम आदमी को राहत दे सकती है। महाराष्ट्र में अगर आप 100 रुपए का पेट्रोल डलवाते हैं तो इसमें से 52.50 रुपए केंद्र व राज्य सरकार की जेब में जाते हैं। ऐसे ही अगर आप दिल्ली में 100 रुपए का पेट्रोल भरवाते हैं तो इसमें से 45.3 रुपए सरकार की जेब में जाते हैं। पेट्रोल का बेस प्राइज पर जो अभी 49 रुपए के करीब है, इस पर केंद्र सरकार 27.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं, जिसके बाद इनका दाम बेस प्राइज से 3 गुना तक बढ़ गया है। ऐसे में बिना टैक्स में राहत दिए पेट्रोल के दाम कम कर पाना मुमकिन नहीं है। जहां एक ओर कोरोना महामारी के कारण आम आदमी की आमदनी घटी है तो वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर खूब कमाई की है। बीते 3 सालों में जहां एक ओर प्रति व्यक्ति सालाना आय 1.26 लाख रुपए से घटकर 99,155 रुपए सालाना पर आ गई है वहीं सरकार की एक्साइज ड्यूटी से कमाई 2,10,282 करोड़ रुपए से बढ़कर 3,71,908 करोड़ पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के जरिए टैक्स लेती है। मई 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तब केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 10.38 रुपए और डीजल पर 4.52 रुपए टैक्स वसूलती थी। ये टैक्स एक्साइज ड्यूटी के रूप में लिया जाता है। मोदी सरकार में 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, लेकिन घटी सिर्फ 4 बार। इस वक्त एक लीटर पेट्रोल पर 27.90 रुपए और डीजल पर 21.80 रुपए एक्साइज ड्यूटी लगती है। मोदी के आने के बाद केंद्र सरकार पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 6 गुना टैक्स बढ़ा चुकी है।
डीजल-पेट्रोल की महंगाई : 100 में से 52 रुपए जाते हैं सरकार के पास, टैक्स घटे तो दाम भी घटेगा
