दुनिया भर में आबादी बढ़ने के साथ ही कंक्रीट निर्माण जोरों से फल-फूल रहा है। जंगल सिमटता जा रहा है। आसपास हरियाली कम होती जा रही है, जिसके चलते तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। प्रकृृति से छेड़छाड़ का परिणाम भी समय-समय पर आपदा के तौर पर देखने को मिलता रहता है। ऐसे में आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने और धरा को हरा-भरा बनाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं तेलंगाना खम्मम जिले के रेड्डिपल्लि गांव के एक बुजुर्ग। 84 वर्षीय दरिपल्ली रमैया अब तक एक करोड़ से अधिक पौधों को पेड़ बना चुके हैं। दरिपल्ली रमैया को लोग ‘ट्री मैन’ के नाम से भी जानती है। ‘ट्री मैन’ बीज बोकर पौध उगाते हैं और फिर उसे रोपकर बच्चे की तरह देखभाल कर पेड़ बनाते हैं। रमैया अभी तक एक करोड़ से ज्यादा पेड़ लगा चुके हैं। पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ने के कारण उनका मन विचलित होने लगा। तब उन्होंने पेड़ लगाने के लिए अभियान की शुरुआत की है। इसके बाद से वो अपनी जेब में बीज और साइकिल पर पौधे रखकर जिले का लंबा सफर तय करने लगे। जहां भी उन्हें खाली जगह दिखती वहीं वो पौधे लगा देते। इसकी शुरुआत उन्होंने अपने गांव रेड्डिपल्लि से की।  पेड़ों और हरियाली के प्रति उनके इस जुनून के लिए लोगों ने उन्हें ‘पागल’ तक कहा, लेकिन जब उन्हें साल 2017 में भारत सरकार की तरफ से इसी नेक काम के लिए ‘पद्मश्री सम्मान’ मिला तो सबकी जुबान पर ताले जड़ गए और लोग उनकी वाहवाही करने लगे। पेड़ों को बच्चों की तरह पालते हैं पर्यावरण प्रेमी दरिपल्ली रमैया पेड़ों के प्रति जिम्मेदारी तक ही सीमित नहीं रहते बल्कि वे स्वयं पे?-पौधों की देख-रेख भी करते हैं। कोई पेड़ सूख जाए, तो उन्हें कष्ट होता है। वो पेड़ों को बच्चे की तरह ही पालते हैं। वो पेड़-पौधों के बारे में इतना ध्यान बटौर चुके हैं कि उनके पास 600 से ज्यादा किस्म के बीज हैं। जिनकी गुणवत्ता का ज्ञान उनको कई पढ़े-लिखे और पर्यावरण विद लोगों से ज्यादा ही है। हालांकि वो ज्यादा पढ़े-लिखे भी नहीं। हरियाली और वृक्षारोपण के प्रति जागरुक करने वाले रमैया के पास जब अपने अभियान के लिए पैसे कम पड़ने लगे, तो उन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन बेच दी। उस रुपयों से बीज और पौधे खरीद और अपने अभियान को जारी रखा।