एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण हम सभी को पानी के संरक्षण में सहयोग देना चाहिए। पानी बचाने का पहला कदम शुरू होता है, उसे बर्बाद होने से रोकने से। यह बात बेहद उत्साहित करने वाली है कि देश के कई आवासीय परिसर विभिन्न तरीकों से पानी बचा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, बेंगलुरु के रहेजा रेजिडेंसी अपार्टमेंट ओनर्स की सर्वोच्च संस्था के अध्यक्ष सुदर्शन धुरू ने कहा कि उनकी सोसाइटी बारिश के पानी का संरक्षण कर रही है। उन्होंने कहा, ‘छतों से होते हुए बारिश का पानी 5 हजार लीटर वाले 30 टैंकों में भर जाता है। इस पानी को सात रेनवाटर हार्वेस्टिंग वाले गड्ढों में भी डाला जाता है, जिसमें चार फीट का व्यास और 15 फीट की गहराई होती है। टैंकों में जमा पानी का इस्तेमाल हफ्ते में तीन दिन कारों को धोने और सामान्य क्षेत्र के गलियारों में पोंछा लगाने के लिए किया जाता है। इस पानी का इस्तेमाल टॉयलेट्स में भी किया जाता है। हमने अपने फ्लशिंग सिस्टम में मॉडिफिकेशन्स किए हैं, जिससे पानी का निर्वहन लगभग 60 प्रतिशत कम हो जाता है, जिससे हर फ्लश के दौरान लगभग 15 लीटर पानी की बचत होती है।’ ज्यादातर लोग नलों को खुला छोड़ देते हैं, बिना यह सोचे कि इससे कितना पानी बर्बाद हो जाता है। अर्थफोकस के सह-संस्थापक रोशन कार्तिक ने कहा कि ऐसे कई तरीके हैं, जिनसे पानी को बर्बाद होने से रोका जा सकता है। उदाहरण के तौर पर उनकी कंपनी क्वामिस्ट बनाती है जो पानी को बर्बाद होने से रोकता है। कार्तिक कहते हैं, ‘इन नलिका को टंकी पर लगाया जाता है और उससे आउटपुट घटता है और 95 प्रतिशत तक सेविंग्स होती हैं। इस तरह कोई भी पानी का सही तरह से उपयोग कर सकता है क्योंकि एक मिनट में एक टंकी से 10-12 लीटर पानी गिरता है।’ 660 रुपए की कीमत वाला क्वामिस्ट डुअल फ्लो ऑप्शन्स के साथ आता है और यह घरेलू इस्तेमाल के लिए परफेक्ट है। 550 रुपए में आने वाला इकोमिस्ट  एक टैम्पर प्रूफ मॉडल है, जिसे पब्लिक और कमर्शियल प्लेस पर इस्तेमाल किया जा सकता है। जल संरक्षण विशेषज्ञ, आर्किटेक्ट और बायोम एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस के निदेशक एस विश्वनाथ ने कहा कि जिन इलाकों में अपर्याप्त संसाधन हैं, वहां पानी बचाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सबसे तेज समाधान है। विश्वनाथ पानी के कम इस्तेमाल, फिर से इस्तेमाल और रीसाइकिल के कॉन्सेप्ट पर जोर देते हैं। वह कहते हैं, ‘आप बारिश के पानी को टैंकों में स्टोर कर सकते हैं और उसका इस्तेमाल टॉयलेट फ्लश और पौधों को पानी देने इत्यादि में कर सकते हैं। गड्ढों के माध्यम से भूजल को रिचार्ज, खोदे गए कुओं, बोरवेल और खदानों को रिचार्ज करने के लिए भी बारिश के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।’