दुनियाभर में प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या ने सभी की चिंताओं को बढ़ाया हुआ है। भारत में भी मेट्रो शहरों में प्रदूषण के स्तर ने कई तरह की समस्याओं को जन्म दिया है। हर साल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में एयर क्वालिटी खराब होती है और लोगों को सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में भारत में एक ऐसा गांव भी है जो हरियाली को महत्व देता है। यहां के लोग स्वच्छ हवा में सांस ले रहे हैं। ये सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का पहला ग्रीन विलेज है। इस गांव का नाम है खोनोमा जो बेहद सुंदर है और नगालैंड की राजधानी कोहिमा से केवल 20 किलोमीटर की दूरी पर है। 700 साल पुराने इस गांव में जहां देखेंगे हरियाली देखने को मिलेगी। इस गांव में करीब 600 घर होंगे जबकि आबादी 3000 हजार के करीब होगी। इस गांव में यदि आप जाएंगे तो आसमान भी पहाड़ों से बाते करता हुआ प्रतीत होगा और मन को शांति की अनुभूति होगी। खोनोमा गांव ‘अंगमी’ आदिवासियों का घर है। ये आदिवासी समूह अपनी बहादुरी और मार्शल आर्ट्स कौशल के लिए मशहूर है। यही नहीं अपने हरे-भरे जंगलों और खेती की पारंपरिक तकनीक के लिए भी यह जाना जाता है। ग्रीन विलेज का मॉडल बन चुका ये गांव, सतत विकास के सिद्धांतों को वर्षों पहले ही अपना चुका है। 90 के दशक में ही इस गांव के लोगों ने वन कटाई और शिकार जैसे गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। आज भी इस गांव में कोई पेड़ नहीं काटा जाता है। यहां तक कि गांव के जानवरों का संरक्षण किया जाता है। यहां आवश्यकता पड़ने पर केवल टहनियों को काटा जाता है। इस गांव झूम खेती की जाती है। इस गांव में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं और गांव के लोग गर्व से अपने गांव का बखान करते हैं।
भारत के खोनोमा गांव में एक भी पेड़ नहीं काटा जाता