मुंबईः खाने के तेल की कीमतों में आने वाले दिनों में 3 से 5 रुपए प्रति लीटर की कमी आ सकती है। खाद्य तेल इंडस्ट्री के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने अपने सदस्यों से इस तरह की मांग की है। एसईए ने अपने सदस्यों से कहा कि वे तुरंत खाने के तेल की कीमतों में कमी करें। यह कमी अधिकतम खुदरा मूल्य में की जाएगी। हालांकि संगठन ने यह भी कहा है कि जिस तरह के वैश्विक घटनाक्रम बन रहे हैं, उससे खाने के तेल की कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट आने की उम्मीद नहीं है। यह दूसरा मौका है जब एसईए ने अपने सदस्यों से अधिकतम खुदरा मूल्य में कटौती करने की अपील की है। पिछली बार, इसने नवंबर 2021 में दिवाली के आस-पास कीमतों में 3 से 5 रुपए की कमी करने की मांग की थी। इसके बाद तेल कंपनियों ने ऐसा किया था। भारत अपने खाद्य तेलों की 60 फीसदी से अधिक की मांग को आयात के जरिए पूरा करता है। भारत ने खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों पर अंकुश रखने के लिए पिछले कुछ महीनों में पाम तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने, स्टॉक सीमा लागू करने जैसे विभिन्न कदम उठाए थे। सरकार के इन सक्रिय प्रयासों के बावजूद, औसत खुदरा कीमतें एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में अभी भी ज्यादा हैं। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा कि इन कीमतों में नरमी के कोई तत्काल संकेत नहीं दिख रहे हैं। इंडोनेशिया जैसे कुछ निर्यातक देशों ने भी लाइसेंस के जरिए पाम तेल के निर्यात को रेगुलेट करना शुरू कर दिया है। वैश्विक खाद्य तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। रूस और युक्रेन के बीच तनाव उस क्षेत्र से आने वाले सनफ्लावर तेल के लिए आग में घी डालने का काम कर रहा है। ला नीना के कारण ब्राजील में खराब मौसम ने भी लैटिन अमेरिका में सोया की फसल को काफी कम कर दिया है। इस वैश्विक स्थिति को देखते हुए एसईए ने कहा कि हालांकि इसके सदस्य खाने के तेलों की सप्लाई बनाए रखने के लिए जूझ रहे हैं। एसईए ने कहा कि घरेलू सरसों की फसल काफी बेहतर है। चालू वर्ष के दौरान रिकॉर्ड फसल की उम्मीद की जा रही है। इससे ग्राहकों को कुछ राहत मिल सकती है। इसके अलावा, सरकार नई सरसों की फसल बाजार में आने से पहले कीमतों को नरम करने के लिए तुरंत कदम उठाने में सक्रिय रही है। कच्चे पाम तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी में हाल ही में 2.5 फीसदी की कमी इसका एक उदाहरण है।