ओलंपिक को खेलों का महाकुंभ कहा जाता है। हर चार साल के अंतराल पर इस खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वो ओलंपिक खेल में भाग ले। इस खेल प्रतियोगिता में तरह-तरह के खेलों का आयोजन होता है। तैराकी, बॉलीबाल, कुश्ती, तीरंदाजी, जैसे अन्य ढेर सारे खेलों से जुड़े खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। अभी बीते 4 फरवरी को विंटर ओलंपिक की शुरूआत हो चुकी है। ये प्रतियोगिता चीन के बीजिंग शहर में आयोजित की गई है। विंटर ओलंपिक में बर्फ पर खेले जाने वाले खेलों का आयोजन होता है। वैसे तो हर खेल का अपना एक अलग रोमांच होता है, लेकिन आज हम ओलंपिक के झंडे के बारे में बात करेंगे। आपने देखा होगा कि ओलंपिक के झंडे में पांच छल्ले और इनके रंग भी अलग-अलग होते हैं। झंडे में इन पांच छल्लों का मतलब बहुत कम लोगों को पता होता है। आइए जानते हैं कि इन छल्लों का क्या मतलब होता है। ओलंपिक के इस लोगो को साल 1913 में बनाया गया था। पहले इस लोगो को ओलंपिक सिंबल कहा जाता था, लेकिन बाद में इन्हें ओलंपिक रिंग्स कहा जाने लगा। इस लोगो को पिअर डे कोबेर्टिन ने डिजाइन किया था। इस लोगो को बनाने का मुख्य उद्देश्य था कि खिलाड़ियों में खेल भावना बनी रहे। लोगो में 5 रिंग्स एक ही आकार के बनाए गए। इसके साथ ही इनको अलग रंग दिया गया। इन रंगों में नीला, पीला, काला, हरा और लाल शामिल किया गया। इन ओलंपिक रिंग्स को लेकर लोगों का ये मानना है कि हर एक रिंग एक अलग महाद्वीप को दर्शाता है और इन्हीं पांच महाद्वीप के खिलाड़ी इस खेल महाकुंभ में हिस्सा लेते हैं। दरअसल, सच ये नहीं है। ओलंपिक चार्टर के अनुसार, ओलंपिक सिंबल ओलंपिक के मूवमेंट को दर्शाता है। जब 1913 में इस सिंबल को बनाया गया तब झंडे के सफेद बैकग्राउंड के साथ उस समय के सारे देशों के झंडों को एक साथ मिलाकर 5 अलग-अलग रंग बनाए गए थे।
ओलंपिक रिंग्स अलग-अलग रंगों के क्यों बनाए जाते हैं
