मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की दो महीने में होने वाली मौद्रिक नीति की बैठक आज से शुरू हो गई है। हालांकि इस बार भी दरों में बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है। अमरीका का सेंट्रल बैंक अगले महीने से ब्याज दरों को बढ़ाने की घोषणा करेगा। वह साल भर में 4 से 5 बार ऐसा करेगा। रिजर्व बैंक ग्रोथ पर फोकस रखेगा और इसके लिए वह दरों में बदलाव नहीं करेगा। यह ठीक सरकार की लाइन के अनुसार है। बजट में भी सरकार ने पूरी तरह से ग्रोथ पर फोकस किया है। रिजर्व बैंक की मीटिंग का फैसला 10 फरवरी को आएगा। इस दौरान उसे कोविड की तीसरी लहर, क्रिप्टोकरेंसी पर गाइडलाइंस, महंगाई और अन्य मुद्दों पर फोकस करना होगा। अभी रेपो रेट 4प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 3.35प्रतिशत है। आरबीआई ने लगातार 9वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। मई 2020 से यह उसी लेवल पर है। रेपो रेट अप्रैल 2001 के बाद से सबसे निचले स्तर पर हैं। अंतिम बार आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 6 दिसंबर को शुरू हुई थी जो उस कैलेंडर वर्ष में आखिरी बैठक थी। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 9.5प्रतिशत बरकरार रखा है। विश्लेषकों ने पहले ही यह कहा था कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी को और मजबूत करने के लिए आरबीआई अभी दरों में बदलाव नहीं करेगा। ब्रोकरेज हाउसों का अनुमान है कि इस बार भी रिजर्व बैंक देखो और इंतजार करो की नीति अपनाकर दरों को यथावत रखेगा। बजट में शुद्ध रूप से 11.6 लाख करोड़ रुपए की उधारी लेने का अनुमान लगाया गया है। यह बैंक ऑफ अमरीका के 9.6 लाख करोड़ रुपए के अनुमान से ज्यादा है। बैंक ऑफ अमरीका को उम्मीद है कि मार्च-अप्रैल तक रिवर्स रेपो रेट में 40 बेसिस पॉइंट की बढ़त हो सकती है। जबकि जून में पहली बार रेपो रेट को बढ़ाया जा सकता है और 2022 के अंत तक इसे 4.75प्रतिशत किया जा सकता है। रेपो रेट वह रेट होता है जिस पर रिजर्व बैंक से बैंकों को कर्ज मिलता है। दूसरी तरफ, रिवर्स रेपो रेट इसका उलटा होता है। यानी रिवर्स रेपो रेट वह दर होता है जिस दर पर बैंकों को रिजर्व बैंक के पास अपना पैसा रखने पर ब्याज मिलता है।
रिजर्व बैंक की बैठक शुरू, ब्याज दरों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं
