पाकिस्तान शुरू से ही आतंकियों को भारत में भेजकर अस्थिरता फैलाने तथा हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम करता रहा है। वह नहीं चाहता कि भारत में अमन-चैन बना रहे। धीरे-धीरे पाकिस्तान दुनिया के आतंकियों का गढ़ बन गया है। विश्व में कहीं भी होने वाली घटना के तार निश्चित रूप से पाकिस्तान से जुड़े मिलते हैं। दुनिया के बड़े-बड़े आतंकियों का गढ़ पाकिस्तान ही है। यही कारण है कि आतंकियों को वित्त पोषण करने पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इस देश को ग्रे लिस्ट में रखा है। एफएटीएफ का कहना है कि पाकिस्तान उसके द्वारा तय किए गए मानदंडों पर खड़ा नहीं उतर रहा है। इस कारण पाकिस्तान को वित्तीय संकट जूझना पड़ रहा है। चीन के कर्जजाल में फंसे पाकिस्तान को बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है। दुनिया को आतंकियों की आपूर्ति करने वाला पाकिस्तान जैसा देश अब खुद ही गृहयुद्ध की चपेट में आ गया है। पाक अधिकृत कश्मीर की जनता पाकिस्तानी सेना की अत्याचार से तंग आ चुकी है। पाकिस्तान सरकार उनके हितों का कोई ध्यान नहीं रखती बल्कि उनके संसाधनों का लगातार दोहन कर रही है। वन बेल्ट वन रोड परियोजना के नाम पर चीन और पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर के प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचा रखे हैं। पाकिस्तान के दूसरे प्रांत बलूचिस्तान में तो वहां की जनता ने सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन छेड़ रहा है। चीन और पाकिस्तान सरकार मिलकर बलूचिस्तान की जनता के खिलाफ हर तरह का अत्याचार कर रही है। अब वहां की जनता का गुस्सा उबल पड़ा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे कई संगठनों ने अब वहां की सरकार तथा सेना के खिलाफ  जंग का ऐलान कर रखा है। दो दिन पहले दक्षिण-पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत स्थित पंजनूर एवं नौशकी में सेना के दो शिविरों पर बीएलए के कैडरों ने धावा बोला उस दौरान 15 आतंकी तथा चार सैनिक मारे गए। हालांकि गैर-सरकारी सूत्रों का कहना है कि मरने वाले सैनिकों की संख्या बहुत ज्यादा है। वहां की सेना ने इस घटना के बाद निकासी अभियान शुरू किया है, जिसके तहत दोनों पक्षों की ओर से हताहत होने की खबर है। तालिबान के साथ सीमा विवाद को लेकर ताजा टकराव के बाद पाकिस्तानी सेना भारी दबाव में है। पाक का मानना था कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद उनकी मनमानी चलेगी। लेकिन सीमा विवाद के मुद्दे को लेकर तालिबान द्वारा अपनाए गए कड़े रुख को देखकर पाकिस्तानी हुक्मरान अचंभे में हैं। पाक को लग रहा था कि उसके यहां सक्रिय आतंकी संगठनों को अफगान की सीमा के भीतर भेजकर अपना एजेंडा चलाएंगे। लेकिन तालिबान की सरकार पाकिस्तान का कठपुतली बनने को तैयार नहीं है। जिस तरह से गृहयुद्ध की ज्वाला फैलती जा रही है उससे पाकिस्तान की चुनौती और आगे बढ़ने वाली है। भारत के लिए गड्ढा खोदने वाला पाकिस्तान अपने ही द्वारा बनाए चक्रव्यूह में फंस गया है।