ज्योतिर्विद् विमल जैन

भारतीय संस्कृति में हिन्दू मान्यता के अनुसार सर्वविघ्नविनाशक अनंतगुण विभूषित प्रथम पूज्यदेव भगवान श्रीगणेशजी की महिमा अपरम्पार है। श्रीगणेशजी की भक्तिभाव व पूर्ण आस्था के साथ किए गए वरद् वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी के व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि के साथ अलौकिक शान्ति व खुशहाली की प्राप्ति होती है। मास के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेशजी को अतिप्रिय है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन  ने बताया कि प्रत्येक माह के शुक्लपक्ष में चतुर्थी तिथि के दिन गौरीनंदन श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदाई होता है। शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को किए जाने वाला व्रत वरद् वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी या विनायकी श्रीगणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष में श्रीगणेश जी को केतुग्रह का देवता माना गया है। विमल जैन ने बताया कि माघ शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि शुक्रवार, 4 फरवरी को पड़ रही है। माघ मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि गुरुवार, 3 फरवरी को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 4 बजकर 39 मिनट पर लगेगी जो शुक्रवार, 4 फरवरी को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 3 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। मध्याह्न व्यापिनी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत शुक्रवार, 4 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन श्रीगणेश भक्त व्रत-उपवास रखकर श्रीगणेशजी की विधि-विधानपूर्वक व्रत-उपवास रखकर श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना करके लाभान्वित होंगे।

ऐसे होगी श्रीगणेश जी की पूजा : प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में व्रतकर्ता को समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करने के पश्चात् वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। श्रीगणेशजी का पंचोपचार, दशोपचार या षोडशोपचार पूजा-अर्चना पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए। श्रीगणेशजी को दूर्वा एवं मोदक अति प्रिय है, जिनसे श्रीगणेश जी शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं। श्रीगणेश का शृंगार करके उन्हें दूर्वा एवं दूर्वा की माला, मोदक (लड्डू), अन्य मिष्ठान्न, ऋतुफल आदि अर्पित करने चाहिए। धूप-दीप, नैवेद्य के साथ की गई पूजा शीघ्र फलित होती है। 

इन पाठ से होगी मनोरथ की पूर्ति : विशेष अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए श्रीगणेशजी की महिमा में यशगान के रूप में श्रीगणेश स्तुति, संकटनाशन श्रीगणेश स्तोत्र, श्रीगणेश अथर्वशीर्ष, श्रीगणेश सहस्रनाम, श्रीगणेश चालीसा एवं श्रीगणेश जी से संबंधित अन्य स्तोत्र आदि का पाठ अवश्य करना चाहिए। साथ ही श्रीगणेशजी से संबंधित मंत्र का जप करना लाभकारी रहता है। ऐसी धार्मिक व पौराणिक मान्यता है कि श्रीगणेश अथर्वशीर्ष का प्रातःकाल पाठ करने से रात्रि के समस्त पापों का नाश होता है। संध्या समय पाठ करने पर दिन के सभी पापों का शमन होता है, यदि विधि-विधानपूर्वक एक हजार पाठ किए जाएं तो मनोरथ की पूर्ति के साथ ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। 

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