पर्यावरण को बचाने के लिए आज जरूरत है लोगों की सोच बदलने की। यह सोच वही लोग बदल सकते हैं, जो वास्तव में इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हैं और जानते हैं। अब भी नहीं जागे, तो कब जागेंगे? हमारी धरती को पिछले 100 साल में जितना नुकसान पहुंचा है। उससे पहले शायद ही कभी इतना नुकसान हुआ हो। पृथ्वी का प्राकृृतिक असुंतलन, पिघलते हिम शिखर, पृथ्वी और समुद्री जीवों पर मंडराते खतरे के काले बादल, बाढ़ और सूखे का बढ़ता प्रकोप राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर राजनेताओं को दिखाई ही नहीं दे रहा है। स्वीडन की एक लड़की ग्रेटा थनबर्ग से प्रेरणा लेकर हम सब को पर्यावरण और जीवन की रक्षा के लिए जुटना होगा। आओ पृथ्वी की रक्षा में हम सब जुट जाएं। पर्यावरण को इंसानों ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। हम प्रकृति की चिंता नहीं करते और यही वजह है कि प्रकृति ने भी अब हमारी चिंता छोड़ दी है। हमनें बिना सोचे समझे संसाधनों का दोहन किया है। यही वजह है कि अब पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है और बाढ़, सूखा, सुनामी जैसी आपदाएं आ रही हैं। बरसों से पर्यावरण को हम इंसानों ने बहुत नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अब इसका खामियाजा धरती पर रहने वाली हर प्रजाति को भुगतना पड़ेगा और धीरे-धीरे सब खत्म हो जाएंगे। इसलिए जरूरत है कि हम सब जाग जाएं और पर्यावरण की रक्षा के लिए मिलकर कदम बढ़ाएं। पहाड़ों में पानी रोका जा रहा है। बांध बनाए जा रहे हैं। जंगलों की कटाई की जा रही है। इसका असर यह हो रहा है कि भूस्खलन हो रहे है। कहीं जरूरत से ज्यादा बाढ़ तो कही सूखा पड़ रहा है। टूरिस्ट पहाड़ों में गंदगी और प्लास्टिक कचरा फैला रहे हैं। प्रकृति का बेहिसाब दोहन के कारण वह समय-समय पर अपना विकराल रूप दिखा रही है। लेकिन इसके बाद भी हम समझ नहीं रहे हैं। धरती का तापमान बढ़ रहा है।