कानपुरः देश में पहली बार सर्राफा कारोबारी सीधे सोना आयात कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, जिन पर खरा उतरने वाले ज्वैलर को ‘क्वालीफाइड ज्वैलर्स’ कहा जाएगा। इंटरनेशनल फायनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी और इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। इस नियम से नकली सोने के सिंडीकेट पर भी लगाम लगेगी। अभी तक सर्राफा कारोबारी सोना सीधे आयात नहीं कर सकते थे। भारत में सात एजेंसियां हैं, जिनके जरिए कारोबारी सोना खरीदते थे। ये एजेंसियां एक किलो सोने के एवज में लगभग सात से आठ हजार रुपए का प्रीमियम लेती हैं। कोई भी पार्टनरशिप फर्म, कंपनी, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप जिनका बिजनेस एचएसएन कोड 7108, 7113, 7114, 7118 से हो रहा हो वह इसके लिए मान्य होंगे। यह कोड कीमती धातुओं के हैं। कारोबारी के सभी जीएसटी रिटर्न भरे हुए हों। कम से कम 90 फीसदी बिजनेस पिछले तीन वर्ष का सोना-चांदी और कीमती पत्थरों का ही हो। कारोबारी की पिछली वित्तीय वर्ष की ऑडिट नेटवर्थ 25 करोड़ से ज्यादा हो। चार्टर्ड अकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी का सर्टिफिकेट लगाना होगा। इन सभी शर्तों को पूरा करने वाले किसी भी इंटरनेशनल एक्सचेंज के ट्रेडिंग मेंबर के जरिए सीधे सोना आयात कर सकेगा। इसके लिए कारोबारी को पहले अपने बैंक से बात करनी होगी, जो सोने के आयात के लिए विदेशी मुद्रा का भुगतान करेंगे। एजेंसियों को दिया जाने वाला कमीशन बचेगा। इससे सोने का आयात बढ़ेगा जिसका सीधा असर कीमत पर पड़ेगा। कारोबारी वायदा बाजार में 22 घंटे कारोबार कर सकेंगे। अभी सर्राफ सुबह नौ बजे से रात 11:55 तक ही ट्रेडिंग कर सकते हैं। अभी सीमित समय होने की वजह से छोटे कारोबारियों को नुकसान का खतरा 60 फीसदी तक रहता है और बड़े कारोबारियों को नुकसान का खतरा 40 फीसदी और मुनाफे की संभावना 30 फीसदी रहती है। अब मुनाफे की संभावना 50 फीसदी तक बढ़ जाएगी। सोने की सट्टेबाजी पर लगाम कसेगी। सीधे आयात और 22 घंटे ट्रेडिंग से सोने के भाव बेलगाम नहीं हो पाएंगे। अभी सोने की आसमान छूती कीमतों में सट्टेबाजी एक प्रमुख कारण है। ग्राहकों को वाजिब कीमत पर सोना मिलेगा। इस नियम का सबसे बड़ा फायदा नकली सोने के सिंडीकेंट पर लगाम लगाना होगा। अभी विदेशी सोने के नाम पर देशभर के बाजारों में नकली मुहर वाले सोने की भरमार है। सीधे आयात से खरा सोना बाजार में पहुंचेगा। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के पंकज अरोड़ा कहते हैं कि 25 करोड़ रुपए की सीमा को घटाना चाहिए ताकि छोटे ज्वैलर्स भी इस सुविधा का फायदा ले सकें। पांच करोड़ नेटवर्थ में इसे लाना होगा।
अब सीधे सोना आयात कर सकेंगे ज्वेलर्स नकली सोने के सिंडिकेट पर लगेगी लगाम
