भारत और मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ शिखर बैठक 27 जनवरी को हो रही है। कूटनीतिक दृष्टिकोण से इस बैठक का काफी महत्व है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डिजिटल माध्यम से कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जुमरात तोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोएव, ताजकिस्तान के राष्ट्रपति इमाम अली रहमान, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली तथा किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्र जपारोप से संवाद करेंगे। इस संवाद के दौरान आपसी हितों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।  पिछले वर्ष की तरह इस बार भी 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी विदेशी मेहमान को आमंत्रित नहीं किया गया है। पहले के कार्यक्रम के अनुसार मध्य एशिया के पांच देशों के प्रमुखों को 26 जनवरी को आमंत्रित करने की योजना थी, लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया है। अब यही बैठक डिजिटल माध्यम से होने जा रही है। अफगानिस्तान में तालिबान राज्य स्थापित होने के बाद मध्य एशियाई देशों का महत्व रणनीतिक दृष्टिकोण से काफी बढ़ गया है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस बारे में विस्तार से बातचीत हुई थी। पहले ये सभी पांचों देश सोवियत संघ का हिस्सा थे। इन देशों में हथियारों के कई कारखाने भी हैं, जिनको चलाने के लिए पंूजी निवेश की जरूरत है। रूस चाहता है कि भारत इन देशों में पूंजी निवेश कर हथिायारों के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाए। चीन ने भी इन देशों में काफी निवेश कर रखा है। अगर भारत मध्य एशियाई देशों में अपना निवेश एवं कारोबार बढ़ाता है तो उससे भारत की पहुंच बढ़ेगी तथा चीन को संतुलित करने का मौका भी मिलेगा। मध्य एशियाई देशों के साथ बेहतर संबंध को बढ़ाना मोदी सरकार विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण एजेंडा है। अगर भारत को चीन, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान पर नजर रखनी है तो उसे मध्य एशियाई देशों को अपने पाले में रखना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में पहली बार मध्य एशिया का दौरा किया था। पिछले 18 दिसंबर से मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों की तीन दिवसीय बैठक नई दिल्ली में हुई थी, जिसमें द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इससे पहले 10 नवंबर को भारत सहित मध्य एशियाई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक हुई थी, जिसमें अफगानिस्तान की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई थी। पाकिस्तान और चीन नहीं चाहते हैं कि भारत और मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध और प्रगाढ़ हो। अगर चीन एवं अफगानिस्तान पर पकड़ मजबूत करनी हो तो मध्य एशियाई देशों में भारत की सामरिक उपस्थिति जरूरी है। ताजिकिस्तान में तो पहले से ही भारत का एक सैन्य बेस है। उम्मीद है कि उक्त शिखर सम्मेलन से मध्य एशियाई देशों के ेसाथ भारत के संबंधों में नए अध्याय की शुरूआत होगी।