इस बात में कोई शक नहीं है कि धरती पर जम्मू-कश्मीर किसी स्वर्ग से कम है। चारों तरफ बर्फीली पहाड़ियों और शांत वातावरण और खूबसूरत घाटियों के बीच मैदानी क्षेत्र भारत के इस राज्य को सबसे खास बनाता है। जम्मू-कश्मीर में ऐसी कई जगहें हैं जहां आप घूम सकते हैं और खूब सारी मस्ती कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है गुरेज घाटी। समुद्रतट से 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ये घाटी श्रीनगर से 125 किमी दूर है। इस घाटी के लोग मूलतः कश्मीरी नहीं है। यहां के लोग दर्द शिन आदिवासी जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग अपनी बोली शिना में बात करते हैं। दर्द शिन आदिवासियों का क्षेत्र दर्दिस्तान के नाम से जाना जाता है। जिसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान और अफगानिस्तान में है। भारत में दर्दिस्तान बस गुरैज वैली ही है। कभी ये जगह सिल्क रूट का हिस्सा थी, लेकिन 1947 के विभाजन के बाद से भारत और पाकिस्तान की सीमा रेखा बन गई। करीब 60 साल तक इस जगह पर बाहर के लोगों को आने की मनाही थी। 2007 में ये जगह टूरिस्टों के लिए खोल दी गई। जन्नत जैसे जम्मू-कश्मीर की गुरेज घाटी में छिपी कुछ खूबसूतरत जगहों ...

दवार : इस घाटी का केंद्रीय हिस्सा है दवार जिसमें कुल मिलाकर 15 गांव है और ये गांव पूरी गुरेज घाटी में फैले हुए हैं। इसके अलावा यहां पर प्राचीन शारदा यूनिवर्सिटी के अवशेष हैं और यहां पर किशनगंगा नदी भी बहती है। इस घाटी में आने वाले पर्यटक दवार देखने जरूर आते हैं। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरे दवार में चारों ओर किशनगंगा नदी की बहती लहरों की आवाज गूंजती है। 

हब्बा खातून : कश्मीरी कवि हब्बा खातून के नाम पर इस जगह का ये नाम रखा या है। इस त्रिकोणीय आकार के पर्वत में हब्बा खातून की अपने पति के प्रेम से जुड़ी कई कहानियां आज भी गूंजती हैं। कहा जाता है कि आज भी आप यहां हब्बा खातून को अपने पति की तलाश करते हुए देख सकते हैं। ये त्रिकोणीय पर्वत गुरेज घाटी का प्रमुख आकर्षण है। तुलैल घाटी : इस जगह आकर आपको दैवीय शक्तियों का आभास होता है। ये जगह पूरी तरह से सकारात्मक वातावरण से भरी हुई है। तुलैल घाटी दवार से लगभग 42 किमी दूर है और पर्यटकों के लिए वाकई में ये किसी जन्नत से कम नहीं है। तुलैल घाटी में कुछ गांव भी हैं। ये घाटी फिशिंग के लिए सबसे ज्यादा मशहूर है। 

हरमुख : सिंध और किशनगंगा नदी के बीच में स्थित है हरमुख जोकि हिमालय की श्रृंख्लाओं का हिस्सा हैं। ये पहाड़ 16870 फीट ऊंचा है। हिंदुओं के लिए हरमुख धार्मिक तीर्थस्थल से कम नहीं है और भगवान शिव का वास होने के कारण इस स्थान को पवित्र माना जाता है। हरमुख की तलहटी में गंगाबल झील है जहां से पर्यटकों को कई खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। 

किशनगंगा : जब आप रजदान पास से गुरेज वैली में घुसते हैं तो आपका स्वागत एक खूबसूरत नदी करती है। गुरेज वैली से होते हुए ये नदी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जाती हैं। जहां इस नदी का नाम बदलकर नीलम नदी हो जाता है, जो आगे जाकर मुजफ्फराबाद में झेलम नदी मे मिल जाती है। यहां आप कई एक्टिविटी कर सकते हैं जैसे कि रिवर राफ्टिंग। 

वुलर लेक : वुलेर लेक गुरेज वैली में नहीं है, ये गुरेज वैली जाने वाले रास्ते में पड़ती है। वुलेर लेक एशिया की ताजे पानी की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। लेक के आसपास हरा-भरा मैदान है जो इस जगह को और भी खूबसूरत बनाता है। आपके पास अगर समय हो तो इस जगह को भी जरूर देखना चाहिए।

गुरेज वैली वैसे तो पूरे साल खूबसूरत रहती है, लेकिन साल के 6 महीने बर्फ से रास्ता बंद हो जाता है। इस वजह से सर्दियों में गुरेज वैली जाना बेवकूफी होगी। यहां जाने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून तक है। सितंबर से अक्तूबर के शुरू के दिनों में भी यहां जाया जा सकता है। इस समय आपको पहाड़ों पर थोड़ी-थोड़ी बर्फ दिखाई दे जाती है।

कैसे पहुँचे : गुरेज वाली जाने के लिए सबसे पहले आपको श्रीनगर जाना होगा। यहां आप ट्रेन या फ्लाइट से पहुंच सकते हैं। श्रीनगर से गुरेज घाटी जाने के दो रास्ते हैं। एक तो आप सड़क मार्ग से रजदान पास होते हुए पहुंच सकते हैं। आप खुद की गाड़ी से यहां आ सकते हैं या टैक्सी बुक करके भी जा सकते हैं। सड़क मार्ग से श्रीनगर से गुरेज वैली पहुंचने में लगभग 6 से 8 घंटे लगेंगे।