नई दिल्ली : एक वाहन से कथित रूप से कुचले जाने के बाद चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। गुस्साई भीड़ की जवाबी कार्रवाई में भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की भी जान चली गई थी। नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का पुनर्गठन किया था। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने चार्जशीट दायर कर दी है। बताया जा रहा है कि 5000 पन्ने की इस चार्जशीट में मुख्य आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र को बनाया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि आशीष मिश्र तीन अक्तूबर 2021 को किसानों को कार से रौंदने वाले घटना के दिन घटनास्थल पर ही मौजूद थे। आशीष मिश्र के खिलाफ एसआईटी का यह चार्जशीट वो अहम सबूत है जिसकी गिरफ्त से निकलना न केवल आशीष मिश्र के लिए अब मुश्किल है, बल्कि इसने उनके पिता अजय मिश्र और भारतीय जनता पार्टी के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्र समेत सभी 13 आरोपी जेल में बंद हैं। भाजपा के लिए तो यह पूरा प्रकरण उसके गले की हड्डी बन गई है जो न तो पार्टी के निगलते बन रहा है न उगलते, क्योंकि अजय मिश्र ने यह दावा किया था कि जब यह घटना हुई थी तो उनके बेटे घटनास्थल पर मौजूद थे। लेकिन अब चार्जशीट में अजय मिश्र का बयान गलत साबित होता दिख रहा है। चुनाव आयोग पांच जनवरी के बाद कभी भी उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनावों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में एसआईटी की चार्जशीट में आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाना विपक्ष के लिए यूपी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। विपक्ष पहले से इस मुद्दे पर भाजपा और अजय मिश्र को घेर रहा है। पिछले साल दिसंबर में खत्म हुए संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष पहले दिन से इस मसले पर लगातार अजय मिश्र का इस्तीफा मांग रहा था। किसान आंदोलन में शामिल किसान संगठनों ने भी उनके इस्तीफे की मांग की थी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने तो इस मुद्दे को उठाकर चुनाव में कांग्रेस को चर्चा में ला दिया था।
आशीष मिश्र के खिलाफ चार्जशीट बनी भाजपा के गले की हड्डी