पिछले एक दशक में दुनियाभर में हृदय रोगियों की संख्या काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हृदय रोग, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं। मुख्यरूप से जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी को हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता था, हालांकि हाल में ही हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि एक खास विटामिन की कमी भी हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकती है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें हृदय संबंधी तमाम बीमारियों का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले अधिक हो सकता है। शरीर के लिए विटामिन-डी को बहुत आवश्यक माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि विटामिन-डी की कमी वाले लोगों को उच्च रक्तचाप का खतरा अधिक होता है, जिसे हृदय रोगों का मुख्य कारक माना जाता है। इस विटामिन के कमी वाले लोगों में अन्य लोगों के मुकाबले हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर सहित हृदय से जुड़ी कई अन्य बीमारियों का खतरा दो गुना तक अधिक हो सकता है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि विश्व स्तर पर हृदय रोग (सीवीडी) दुनियाभर में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं, जो प्रतिवर्ष अनुमानित 17.9 मिलियन लोगों की जान लेती है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया में प्रोफेसर एलिना हाइपोनन कहती हैं, वैसे तो लोगों में विटामिन डी की गंभीर कमी के मामले काफी दुर्लभ हैं। हालांकि इसकी सामान्य मात्रा से अधिक की कमी हृदय पर नकारात्मक डाल सकती है। शहरी आबादी वाले लोगों में विटामिन डी की कमी के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं, इसका प्रमुख कारण पर्याप्त मात्रा में उन्हें सूर्य की रोशनी न मिल पाना हो सकता है। इस बारे में लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। करीब 267,980 लोगों पर किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने विटामिन डी की कमी और सीवीडी के बीच संबंध के बारे में साक्ष्य प्राप्त किए। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि विटामिन डी की शरीर में जितनी कमी होती है, उसी के अनुपात में तमाम तरह के हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। यदि आहार और सूर्य की रोशनी के माध्यम से इस कमी को पूरा करने का प्रयास किया जाए तो वैश्विक स्तर पर बढ़ते हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक आहार में कुछ विशेष बदलाव करके विटामिन-डी की कमी को ठीक किया जा सकता है।