नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश में 658 मेगावाट क्षमता वाली तीन जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला डिजिटल माध्यम से रखी। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम एसजेवीएन करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक समारोह में 210 मेगावाट की लुहरी जलविद्युत परियोजना के पहले चरण की आधारशिला रखी। यह परियोजना शिमला और कुल्लू जिलों में सतलुज नदी पर स्थित है। उन्होंने 66 मेगावाट की धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना की भी आधारशिला रखी जिसका निर्माण 687.97 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह परियोजना हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में ब्यास नदी पर स्थित है। प्रधानमंत्री ने शिमला और मंडी जिलों में स्थित 382 मेगावाट क्षमता की सुन्नी बांध परियोजना के भूमिपूजन समारोह में भी भाग लिया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन निर्माण-स्वामित्व-संचालन-रखरखाव (बूम) आधार पर एसजेवीएन द्वारा किया जाएगा। एसजेवीएन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा ने कहा कि आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति ने नवंबर, 2020 में 1,810 करोड़ रुपए की लागत से 210 मेगावाट की लुहरी-1 जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी थी। परियोजना जनवरी 2026 में पूरी होने की संभावना है। इसके पूरा बनने के बाद सालाना 75.82 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। परियोजना को 66 करोड़ रुपए का बजटीय समर्थन दिया गया है। शर्मा ने बताया कि सरकार ने 66 मेगावाट वाली धौलासिद्ध पनबिजली ऊर्जा परियोजना के लिए 687.97 करोड़ रुपए की लागत को मंजूरी दी थी और 21.6 करोड़ रुपए का बजटीय समर्थन भी दिया। यह परियोजना नवंबर, 2025 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद इससे सालाना 30.4 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 382 मेगावाट क्षमता वाली सुन्नी बांधी परियोजना पर 2,614.51 करोड़ रुपए लागत आने का अनुमान लगाया गया है जिसके शुरू होने पर वार्षिक रूप से 138.2 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन होने की संभावना है।
पीएम ने हिमाचल प्रदेश में 658 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं की रखी आधारशिला