आज विज्ञान हमारे जीवन का अंग बन चुका है। विज्ञान की देन है स्मार्टफोन जो आज हमारी रोज मर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण और अनिवार्य स्थान ले चुका है। आज हम सुबह से लेकर शाम तक स्मार्टफोन से इस कदर चिपके रहते हैं कि हमें अपने आस-पास के सामाजिक वातावरण के बारे में कुछ पता ही नहीं चलता है। हम स्मार्टफोन में इतने खो जाते हैं कि हम अपने परिचितों और अपने सामाजिक बंधुओं की खोज खबर नहीं ले पा रहे हैं। हम समाज से कटते जा रहे हैं। इस स्मार्टफोन हमारे व्यक्तिगत संचार और रिश्तों को भी प्रभावित कर रहा है। आधुनिक विज्ञान के जीवन स्मार्टफोन का हम इतना इस्तेमाल करने लगे हैं कि हम अपने बच्चों के साथ अपने संबंधों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। जिससे हमारे और हमारे बच्चों के बीच दूरी बढ़ती ही जा रही है और संबंधों पर बुरा असर पड़ रहा है। मोबाइल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण हम अपने बच्चों के व्यवहार पर पड़ने वाले गलत प्रभाव पर गौर नहीं कर पा रहे हैं। स्मार्टफोन के चलते हमें लग रहा है कि बच्चों के साथ हमारे संबंध खराब होते जा रहे हैं। स्मार्टफोन के अंधाधुंध उपयोग करने से ही हमारा ध्यान अपने बच्चों के ऊपर से भटक गया है और हम उन पर नजर नहीं रख पा रहे हैं। कोरोना महामारी के संक्रमण के बाद तो स्मार्टफोन का इस्तेमाल और बढ़ गया है जिससे समाज में लोगों के बीच की दूरी बढ़ी है। लोग किसी से मिलने की बजाय अपने कीमती समय स्मार्टफोन पर ही जाया करने में जुट जाते हैं। इस तरह से स्मार्टफोन समाज और हमारे बीच की दूरी के और बढ़ाता ही जा रहा है।
सामाजिक मेलजोल और रिश्तों को प्रभावित कर रहा स्मार्टफोन
