इस बार सोमवार, 27 दिसंबर 2021 को रुक्मिणी अष्टमी पर्व है। आप सभी को बता दें कि इस दिन भगवान कृृष्ण और रुक्मिणी की पूजा की जाती है। वहीं मान्यताओं के अनुसार इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, वे विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थी। आप सभी को बता दें कि उन्हें पौराणिक शास्त्रों में लक्ष्मीदेवी का अवतार कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि रुक्मिणी अष्टमी के दिन विधिपूर्वक देवी रुक्मिणी की पूजा अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन के समस्त कष्टों का अंत होता है। अब हम आपको बताते हैं रुक्मिणी अष्टमी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
रुक्मिणी अष्टमी का शुभ मुहूर्त :
रुक्मिणी अष्टमी व्रत आरंभ : 26 दिसबंर 2021, रविवार प्रातः 09.35 से, रुक्मिणी अष्टमी व्रत समाप्त : 27 दिसंबर 2021, सोमवार प्रातः 9. 00 बजे तक।
रुक्मिणी अष्टमी व्रत पूजा विधि- इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत रखने वाली स्ति्रयां स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब भगवान सत्यनारायण ,पीपल व तुलसी को अर्घ्य दें। मान्यताओं के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु और तुलसी में माता लक्ष्मी जी का वास होता है। इसके बाद घर के मंदिर में गंगाजल से छिड़काव कर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर सर्वप्रथम भगवान गणेश की स्थापना करें और फिर भगवान कृृष्ण और देवी रुक्मिणी की मूर्ति स्थापित करें। अब चौकी के एक ओर शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी का कलश रखकर ऊपर आम, अशोक के पत्तें रखें और फिर एक नारियाल रखें। इसके बाद पूजा आरंभ करें। ध्यान रहे पूजन करते समय सर्वप्रथम भगवान गणेश जी की पूजा करें, फिर भगवान कृृष्ण व देवी रुक्मिणी को जल से स्नान कराएं और फिर उनका अभिषेक करें। अब देवी रुक्मिणी को फल, फूल, रौली-मौली, चावल, सुपारी, लॉग, नैवेद्य, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान कृृष्ण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और माता रुक्मिणी को लाल रंग के वस्त्र और शृंगार का सामान अर्पित करें। अब रुक्मिणी अष्टमी व्रत की कथा सुनें और आरती करें। ध्यान रहे इस दौरान भोगस्वरूप माता रुक्मिणी को खीर चढ़ाएं और सभी उपस्थति लोगों में इसी प्रसाद का वितरण करें।