क्रिसमस का पर्व बहुत धूम-धाम से मनाया जाने वाला पर्व है। इस पर्व के दिन देश-दुनिया भर में प्रभु जीसस के जन्मदिन को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। जी हां और उनके बताए उपदेश-संदेशों को याद किया जाता है। आप सभी जानते ही होंगे इस दिन का बच्चों को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। ऐसे में हर व्यक्ति अपने घर में इस दिन क्रिसमस ट्री सजाते हैं। वहीं बच्चों को इस दिन बड़ों से गिफ्ट, चॉकलेट्स मिलते हैं। हालांकि इन खुशियों के बीच यह भी जरूरी है कि बच्चे प्रभु जीसस की शिक्षाओं को जानें और अमल में भी लाएं। जी हां और इसके लिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को प्रभु  जीसस के उपदेश-संदेशों को बताएं-समझाएं, जिससे उनका जीवन सही मार्ग पर चलते हुए खुशहाल बनें। आज हम आपको उन्ही संदेशों के बारे में बताने जा रहे हैं। करुणा का भाव- प्रभु जीसस के जीवनकाल की कई कहानियां मौजूद हैं, जहां उन्होंने जरूरतमंद और रोगियों की मदद की, उनकी देखभाल स्वयं की, उनके प्रति करुणा दिखाई। इसी के चलते वह हर व्यक्ति के हृदय में बस गए। प्रभु जीसस का सबके लिए यही संदेश था कि अपने मन में करुणा का भाव रखें। इसके अलावा जरूरतमंदों की मदद करें। ऐसा करने के बाद ही हम सच्चे-नेक इंसान कहलाएंगे। बुजुर्गों की सेवा करें। पशु-पक्षियों को भी कभी दुख ना पहुचाएं। प्रेम बांटे- प्रभु जीसस अपने एक कथन में कहते हैं कि मैं तुम्हें एक नया आदेश देता हूं, एक-दूसरे से प्रेम करो, जैसे मैंने तुमसे किया है। ऐसे में जब तक हम एक-दूसरे के प्रति मन में प्रेम की भावना नहीं रखते हैं, तब तक हमारा जीवन अधूरा है, हम खुशी-सुकून से दूर हैं। सभी को अपने बच्चों को प्रेम, स्नेह, अपनापन बांटने, साझा करने का महत्व समझाना चाहिए। सच्चाई की राह पर बल- सच बोलने के लिए अपने बच्चों को प्रेरित करें। प्रभु जीसस का एक कथन है-‘मैं मार्ग हूं, मैं सत्य हूं और जीवन हूं, मेरे पास आए बिना कोई परमपिता तक नहीं पहुंचता है।’ इस बात का अर्थ है कि सत्य के मार्ग पर चलकर ही ईश्वर तक पहुंचा जा सकता है, जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है, बच्चों को सच बोलने और ईमानदार बनने की सीख दें।