गुवाहाटीः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद और राज्य विधानसभाओं में कार्यवाही में लगातार व्यवधान और गरिमा की कमी पर शुक्रवार को चिंता जताई और कहा कि असहमति के कारण गतिरोध पैदा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कार्यवाही में व्यवधान को नैतिक और संवैधानिक रूप से गलत बताते हुए कहा कि यह उस समय और भी परेशान करने वाला होता है जब ऐसे व्यवधान पूर्व नियोजित होते हैं। लोस अध्यक्ष बिरला ने असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र चर्चा और संवाद पर आधारित है, लेकिन सदन में चर्चा के दौरान लगातार व्यवधान और गरिमा की कमी चिंता के विषय हैं। उन्होंने कहा कि सदन में विचारों में अंतर के साथ ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच असहमति स्वाभाविक है, लेकिन असहमति को गतिरोध का कारण नहीं बनना चाहिए। लोकसभाध्यक्ष ने राजनीतिक दलों को सलाह दी कि वे जटिल मुद्दों पर चर्चा करें और सुनिश्चित करें कि सदन इस तरह से काम करे कि यह लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करे। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही में बाधा डालना नैतिक और संवैधानिक रूप से सही नहीं है। कई बार व्यवधान पूर्व नियोजित होते हैं। इस तरह का आचरण और भी परेशान करता है। उन्होंने कहा कि व्यवधान और कार्यवाही का स्थगन भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का हिस्सा नहीं है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने को कहा। बिरला ने कहा कि भारत जैसा विविधतापूर्ण देश संसदीय लोकतंत्र से जुड़ा हुआ है और देश आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है, इस यात्रा के दौरान हमारा लोकतंत्र निरंतर सशक्त और मजबूत हुआ है। इसलिए यह फिर से गौर करना आवश्यक हो गया है कि सदन, जो व्यवस्था का एक अभिन्न अंग है, किस प्रकार काम करता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में सबसे मजबूत लोकतंत्र भारत में है। भारत लोकतंत्र की जननी है और विश्व भारत के लोकतांत्रित व्यवस्था का आध्ययन कर रही है। उन्होंने जन प्रतिनिधियों से कहा कि जनप्रतिनिधियों से लोगों की अपेक्षाएं और आकांक्षाएं भी बढ़ी है। लोकतांत्रिक संस्था को जनता की समस्याओं के समाधान का एक मजबूत माध्यम माना जा रहा और उनके हित के लिए काम करना होगा। बिरला असम विधानसभा को संबोधित करने वाले पहले लोकसभाध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि राज्य विविधता में एकता का एक जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि असम वह सेतु है जो समृद्ध विविधता वाले पूर्वोत्तर हिस्से को शेष भारत से जोड़ता है। यह विविधता हमारे लोकतंत्र को और लचीला बनाती है। उल्लेखनीय है कि विस अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने लोस अध्यक्ष का सदन में परिचय तथा उनके बारे में बताया जबकि मुख्यमंत्री डा.हिमंत विश्वशर्मा ने उनका स्वागत करने के साथ ही असम विधानसभा के ऐतिहासिक पक्ष को रखा। वहीं सदन में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया,एआईयूडीएफ, अगप, यूपीपीएल, बीपीपीएफ समेत अन्य दलों के प्रतिनिधियों ने बिरला का स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि बिरला ने विधान भवन के केंद्रीय कक्ष में एक कार्यक्रम में असम विधानसभा डिजिटल टीवी की शुरुआत की।
संसद व राज्य विधानसभाओं में लगातार व्यवधान चिंता का विषय