वाराणसी (उत्तर प्रदेश)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए देश में गाय और गोबरधन की बात करने को ‘कुछ लोगों’ ने ‘गुनाह’ बना दिया है और ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि देश के आठ करोड़ परिवारों की आजीविका ऐसे ही पशुधन से चलती है, जो ‘हमारे लिए पूजनीय’ है। प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में गुजरात के बनासकांठा जिला दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड की बनास डेयरी सहित 2,095 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद अपने संबोधन में किसी का नाम लिए बगैर यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति को सिर्फ जाति और मजहब के चश्मे से देखने वाले लोगों के ‘सिलेबस (पाठ्यक्रम)’ में केवल माफियावाद और परिवारवाद ही शामिल है। उन्होंने कहा कि गाय कुछ लोगों के लिए गुनाह हो सकती है, हमारे लिए गाय माता है, पूजनीय है। गाय-भैंस का मजाक उड़ाने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि देश के आठ करोड़ परिवारों की आजीविका ऐसे ही पशुधन से चलती है। मोदी ने कहा इन्हीं आठ करोड़ परिवारों की मेहनत से आज भारत हर साल लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपये का दूध उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि भारत में जितना गेहूं और चावल का उत्पादन होता है, उसकी कीमत से भी कहीं ज्यादा इस दूध की कीमत है। इसलिए भारत के डेयरी क्षेत्र को मजबूत करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसी कड़ी में आज यहां बनास काशी संकुल का शिलान्यास किया गया है। पशुधन की महत्ता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब गांव के घर-आंगन में मवेशियों के झुंड ही संपन्नता की पहचान थे और इसे पशुधन कहा जाता था। उन्होंने कहा कि किसके दरवाजे पर कितने खूंटे गड़े हैं, इसको लेकर स्पर्धा रहती थी। हमारे शास्त्रों में भी कामना की गई है कि गाय हमारे चारों ओर रहे और हम गायों के बीच निवास करें। यह क्षेत्र हमारे यहां रोजगार का भी हमेशा से बहुत बड़ा माध्यम रहा है लेकिन बहुत लंबे समय तक इस क्षेत्र को जो समर्थन मिलना चाहिए था वह पहले की सरकारों में नहीं मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब केंद्र सरकार देश भर में इस स्थिति को बदल रही है और इसी क्रम में कामधेनु आयोग का गठन किया गया है और डेयरी क्षेत्र के उन्नयन के लिए एक कोष बनाया गया है तथा बहुत बड़ा अभियान चलाकर लाखों पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से भी जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि छह-सात वर्ष पहले की तुलना में दूध उत्पादन लगभग 45 प्रतिशत बढ़ा है।
गाय कुछ लोगों के लिए ‘गुनाह’ हो सकती है, हमारे लिए तो माता है, पूजनीय है : मोदी