नई दिल्ली : भारत में क्रिप्टोकरेंसी इस समय का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सरकार की ओर से इसे प्रबंधित करने के लिए बिल भी तैयार कर लिया गया है। हालांकि, इसका चालू शीतकालीन सत्र में पास होना मुश्किल है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत में जारी सरगर्मी पर कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के बजाय, इसे लेकर नियामक बनाना बेहद जरूरी है। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लगाने के बजाय रेगुलेट करना चाहिए। उन्होंने इस पर एक वैश्विक नीति बनाने का भी सुझाव दिया। गोपीनाथ ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस पर प्रतिबंध लगाने की राह में कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि क्या आप वास्तव में क्रिप्टो पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, क्योंकि कई एक्सचेंज ऑफशोर हैं और वे किसी विशेष देश के नियमों के अधीन नहीं हैं। वैश्विक नीति की वकालत करते हुए गीता गोपीनाथ ने कहा कि कोई भी देश इस समस्या को अपने दम पर हल नहीं कर सकता है, क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन आसानी से सीमा पार से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पर तत्काल एक वैश्विक नीति की जरूरत है। मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी फिलहाल के लिए वैश्विक खतरा नहीं है। लेकिन बिना नियामक के इस कारोबार को लेकर कई प्रकार की आशंकाएं सामने आती है, जिनका ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है। 49 वर्षीय प्रमुख भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री जनवरी 2019 में मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में आईएमएफ में शामिल हुई थी। मैसूर में जन्मी गोपीनाथ वैश्विक वित्तीय संस्थान की पहली महिला मुख्य अर्थशास्त्री हैं।