पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता
गुवाहाटी : राज्य के सार्वजनिक खंड के दो उद्योग नगांव और कछार के पेपर मिलों को पुनर्जीवित करने के बजाए सरकार इसकी जमीन बेचने की भरसक कोशिश कर रही है। लिक्विडेटर कुलदीप वर्मा ने दो सप्ताह के अंदर दोनों पेपर मिलों की नीलामी के लिए विज्ञापन जारी किया है। इस दौरान लिक्विडेटर ने पेपर मिलों का मूल्य पूर्व के मूल्य में क्रमशः 78 तथा 59 करोड़ रुपए की कमी कर दी। अन्य संपत्ति को छोड़कर दोनों पेपर मिलों के सिर्फ 2581 एकड़ जमीन के मूल्य में 70 करोड़ रुपए की कमी की गई है। पेपर मिलों की जमीन में खनिज तेल का विशाल भंडार होने के बावजूद किसलिए इसके मूल्य में कमी की गई है अभी तक यह पता नहीं चला है। उल्लेखनीय है कि लिक्विडेटर कुलदीप वर्मा ने 25 नवंबर को प्रकाशित नीलाम के विज्ञापन में पेपर मिलों की जमीन का मूल्य 786.18 करोड़ रुपए निर्धारित किया था, परंतु कोई खरीदार न होने के कारण आगामी 9 जनवरी में फिर नीलाम का विज्ञापन प्रकाशित किया गया और इस विज्ञापन में पेपर मिलों की जमीन का मूल्य 707.59 करोड़ रुपए निर्धारित किया है। अर्थात दो सप्ताह में पेपर मिलों की जमीन का मूल्य 78.59 करोड़ रुपए घट गया। अगर इसबार भी कोई खरीद्दार न निकले तो पेपर मिलों की जमीन पानी के दाम पर बेच दिया जाएगा।