‘पूर्वांचल प्रहरी’ का डिजिटल डेस्क: 2026 की तीर्थयात्रा के दौरान केदारनाथ धाम में कुल 50.3 टन कचरा एकत्र किया गया है। तीर्थयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण खाने के पैकेट, पानी की बोतलें और अन्य इस्तेमाल की गई वस्तुओं से निकलने वाले कचरे की मात्रा में बढ़ोतरी हुई है। इस बार महज 5 महीनों में एकत्र हुए कचरे की मात्रा ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है।


जानकारी के अनुसार, 2026 के 5 महीनों में एकत्र हुआ 50.3 टन कचरा, 2025 के पूरे तीर्थयात्रा सीजन के दौरान एकत्र किए गए कचरे की तुलना में 2.5 गुना से भी अधिक है। 50.3 टन कचरे में करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा बताया गया है। पानी की बोतलें, खाने के पैकेट और अन्य प्लास्टिक सामग्री के इस्तेमाल ने पहाड़ी क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की चुनौती को और बढ़ा दिया है। हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री केदारनाथ पहुंचते हैं।


तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं, खाद्य एवं पेय पदार्थों के पैकेट और प्लास्टिक की बोतलों से भी बड़ी मात्रा में कचरा पैदा हो रहा है। केदारनाथ धाम हिमालय के बेहद संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में स्थित है। खासतौर पर प्लास्टिक कचरे का उचित तरीके से संग्रह और निपटान नहीं होने पर पहाड़ी पर्यावरण, जलस्रोतों और स्थानीय जैव विविधता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।


तीर्थयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए केदारनाथ में कचरा संग्रह, पृथक्करण और निपटान की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता सामने आई है।


प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के साथ ही तीर्थयात्रियों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है। केदारनाथ केवल एक पवित्र तीर्थस्थल ही नहीं, बल्कि हिमालय के महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यावरण का भी हिस्सा है।


इसलिए तीर्थयात्रा के दौरान कचरा न फैलाना, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना और पर्यावरण को स्वच्छ रखना हर तीर्थयात्री की जिम्मेदारी है। भक्ति के साथ तीर्थस्थल पर जाएं, तो प्रकृति के प्रति भी उतनी ही जिम्मेदारी निभाएं।

केदारनाथ स्वच्छ रहे, हिमालय की सुंदरता बरकरार रहे।