बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर भाजपा खासकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को करारा झटका दिया है। बांकीपुर सीट नितिन का गढ़ रहा है। नितिन के पिता स्व. नवीनचन्द्र सिन्हा पटना (पश्चिम) विधानसभा क्षेत्र जो अब बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र बन गया है, वहां से चार बार तथा नितिन पांच बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। कायस्थ बहुल इस क्षेत्र पर पिछले 31 वर्षों से भाजपा का कब्जा था जो अब जन सुराज पार्टी के कब्जे में चला गया है। भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले, जबकि राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी रेखा कुमारी को मात्र 14,273 वोट मिले। इस चुनाव में बिहार के सवर्ण मतदाताओं ने स्थानीय कारणों से प्रशांत किशोर को वोट दिया है। भूमिहार के साथ-साथ राजपूत और ब्राह्मण समाज भी भाजपा से नाराज चल रहा है। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के बारें में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बयान भी मतदाताओं को नागवार गुजरा। बिहार की जनता विपक्ष में बैठने के लिए एक तेज तर्रार नेता को मौका देना चाहती थी, ताकि वह सरकार के खिलाफ आवाज उठा सके। राजद विधायक दल के नेता तेजस्वी यादव विपक्षी नेता की भूमिका निभाने में अब तक सफल नहीं हो सके हैं। वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। बिहार की जनता उनके वादों पर विश्वास नहीं की थी। वर्ष 2026 के उपचुनाव में अन्य मुद्दों के अलावा भाजपा की आंतरिक राजनीति भी जिम्मेदार है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले नितिन नवीन को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, जिन्हें बाद में स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। उनकी सीट से भाजपा की हार एक बड़ा संदेश दे रही है। बिहार तथा देश की राजनीति में इसका प्रभाव निश्चित रूप से पड़ेगा। प्रशांत किशोर जैसे नेता के विधानसभा में पहुंचने से सम्राट चौधरी सरकार को कदम कदम पर विरोध का सामना करना पड़ेगा। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने बिहार से युवाओं के पलायन रोकने तथा उन्हें रोजगार देने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। वर्ष 2018 में प्रशांत किशोर जनता दल-यू में शामिल होकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। मतभेद के बाद उन्होंने जनता दल-यू से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद उन्होंने बिहार में जन सुराज पार्टी की स्थापना की। लेकिन बिहार के चुनाव में उनकी करारी हार के बाद कई तरह के प्रश्न उठे। वर्ष 2014 में प्रशांत किशोर भाजपा के लिए भी राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं। ऐसा लगता है कि छात्रों के आंदोलन ने भी उपचुनाव में बिहार में भाजपा के लिए नकारात्मक माहौल तैयार किया। मध्यप्रदेश और गुजरात का चुनाव परिणाम पहले जैसा ही रहा। मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेसी विधायक घनश्याम ङ्क्षसह 6 हजार से ज्यादा वोटों से विजयी घोषित हुए हैं। इस सीट से कांग्रेसी विधायक अयोग्य घोषित कर दिये गए थे। कांग्रेस की सीट कांग्रेस के पक्ष में गई। गुजरात के मांजलपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक के निधन के कारण सीट खाली हुई थी। इस सीट से भाजपा उम्मीदवार भिखाभाई रबारी निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को 30,630 मतों से पराजित किया है। केवल बांकीपुर को छोड़कर बाकी सीटें पहले की तरह ही संबंधित पाॢटयों के पक्ष में गई है। भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा के दावे के कारण दतिया सीट भी चॢचत रहा। बांकीपुर का चुनाव परिणाम भाजपा के लिए बड़ा झटका है जिस पर पार्टी को मंथन करना चाहिए।
नितिन नवीन को झटका