पड़ोसी देशों से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने अपनी रक्षा तैयारी को तेज कर दिया है। पहले चीन और पाकिस्तान से भारत को चुनौती मिल रही थी। अब बांग्लादेश भी भारत को आंख दिखाने लगा है। भारत के लिए एक अच्छी खबर यह है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली भारत विरोधी सरकार का पतन होना तय है, क्योंकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत लेकर भारी जीत दर्ज की है। 17 फरवरी को तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश में नई सरकार का गठन होना है। देखना है कि नई सरकार का रवैया भारत के प्रति कैसा रहता है? भारत ने चौतरफा मिल रही चुनौती को देखते हुए अपनी रक्षा तैयारी में कोई ढील नहीं देना चाहता है। केंद्रीय बजट में रक्षा के मद में 7.85 लाख करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह बजट रक्षा के क्षेत्र में पिछले बजट के मुकाबले 15 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार अपनी रक्षा तैयारी के प्रति कितनी गंभीर है। हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने फ्रांस से 114 लड़ाकू विमान राफेल की खरीद को मंजूरी दी है। इसके साथ ही अमरीका से 6पी-8आई लेने को भी हरी झंडी दिखाई है। रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह की नेतृत्व वाली परिषद ने 3.60 लाख करोड़ के खरीद को मंजूरी दी है। इसमें एंटी टैंक मिसाइल आदि भी शामिल हैं। वायु सेना पिछले कई वर्षों से उन्नत लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए मांग कर रही थी। भारत के पास अभी लड़ाकू विमानों की 31 स्क्वाड्रन है, जबकि स्क्वाड्रन की संख्या 42 होनी चाहिए। इसमें कई ऐसे लड़ाकू विमान हैं जो रिटायर होने की स्थिति में हैं। भारत ने 2015 में फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदा था। 114 लड़ाकू विमानों में से 18 विमान सीधे फ्रांस से बनकर भारत आएंगे, जबकि बाकी विमानों को भारत में ही तैयार किया जाएगा। राफेल में 50 प्रतिशत से ज्यादा कल-पुर्जे तथा उपकरण स्वदेशी होंगे। यह भारत की सबसे बड़ी खरीद मानी जा रही है, क्योंकि रक्षा बजट का लगभग 50 प्रतिशत धनराशि व्यय होगा। इन विमानों को घातक मिसाइलों से लैस किया जाएगा, ताकि इसको ज्यादा खतरनाक बनाया जा सके। अमरीका से 6पी-8आई विमान लेने से नौसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा। भारत ने पहले भी पी-8आई विमान खरीदा है जो काफी कारगर साबित हुआ है। भारत पाकिस्तान तथा बांग्लादेश दोनों ही तरफ से जेहादी तत्वों से घिरा है। दोनों देशों में भारत विरोधी गतिविधियां चरम पर है। भविष्य में भारत को दो या तीन फ्रंट पर वार भी लड़ना पड़ सकता है। चीन लगातार भारत के खिलाफ साजिश रचता रहता है। कभी अरुणाचल पर दावा करता है तो कभी लद्दाख पर। दोनों देशों की सेनाएं अक्सर टकराती रहती हैं। चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने चीनी सीमा पर बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए कई कदम उठाये हैं। अरुणाचल में बना सुरंग इसका जीता-जागता उदाहरण है। भारत ने सिलीगुड़ी स्थित चिकेन नेक को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए 40 किलोमीटर लंबी कॉरीडोर बनाने का निर्णय लिया है, जो भारत और पूर्वोत्तर के बीच विशेष स्थिति में अतिरिक्त कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नुमलीगढ़ से गोहपुर के बीच कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है, जो 33.7 किलोमीटर लंबा होगा। यह टनल भी रणनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। डिब्रूगढ़ के मोरान में हाईवे पर ईएलएफ सुविधा को विकसित किया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है। युद्ध की स्थिति में ईएलएफ सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये हैं। ङ्क्षहद महासागर में चीनी नौसेना के बढ़ते दबदबे को देखते हुए भारत ने अपने युद्धपोतों के लिए फ्रांस से 26 राफेल-एम खरीदा है। इसके अलावा युद्धपोतों को कई खतरनाक मिसाइलों से लैस किया गया है। बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए अब बांग्लादेश सीमा पर भी फोकस किया जा रहा है। चीन के पड़ोसी देशों में भी भारत अपनी सामरिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है। फिलीपींस, वियतनाम एवं मलेशिया के साथ बढ़ती सामरिक साझेदारी इसका सबूत है। भारत मलेशिया के सुखोई-30 विमानों को उन्नत करने के लिए सहयोग देगा। कुल मिलाकर भारत चीन की रक्षा तैयारी को ध्यान में रखकर अपनी तीनों सेनाओं को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर रहा है।
भारत की रक्षा तैयारी