यूरोपीय यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने तथा अमरीका के साथ ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद भारत का मलेशिया के साथ भी 11 सूत्री व्यापार समझौता हुआ है। रविवार को दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण तथा सेमीकंडक्टर जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संबंधों का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुआलालंपुर पहुंचने पर वहां के प्रधानमंत्री ने शानदार स्वागत किया। मलेशिया के साथ बढ़ता संबंध भारत के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुआलालंपुर की धरती से कहा कि दोनों पक्ष ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। चीन लगातार भारत को घेरने के लिए कोशिश करता रहता है। मलेशिया का मजबूत होना चीन के लिए एक बड़ा झटका है। चीन मलेशिया के साथ दादागिरी करता रहता है। भारत मलेशिया में मौजूद सुखोई-30 विमान की मरम्मत के लिए कल-पुर्जे एवं तकनीशियन उपलब्ध करवाएगा। रूस के यूक्रेन युद्ध में फंसे होने के कारण मलेशिया में मौजूद इन रूसी विमानों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही भारत इन विमानों में अपने अस्त मिसाइल को फिट करेगा, ताकि सुखोई-30 को और घातक बनाया जा सके। मलक्का की खाड़ी के किनारे स्थित मलेशिया युद्ध के समय भारत के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि चीन का 80 प्रतिशत व्यापारिक जहाज मलक्का स्टेट से ही गुजरता है। भारत ने पहले ही फिलिपींस एवं वियतनाम के साथ रक्षा साझेदारी को बढ़ाया है तथा ब्रह्मोस मिसाइल की भी आपूॢत की है। दोनों देशों ने व्यापक वार्ता के बाद आतंकवाद पर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर न कोई दोहरा मापदंड चलेगा और न कोई समझौता होगा। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। आॢथक मोर्चे पर भी काफी प्रगति हुई है। दोनों देशों ने व्यापार निस्तारण के लिए स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। भारत मलेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करेगा, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सीट के लिए मलेशिया भारत का समर्थन करेगा। आॢटफिशियल इंटेलीजेंस और डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ-साथ स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी भागेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा। दस देशों के संगठन आसियान के साथ मिलकर भारत पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी ङ्क्षनदा की है। यह बयान पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संकेत है। आतंकवाद विरोधी अभियान तथा खुफिया जानकारी साझा करने पर दोनों देश मिलकर काम करेंगे। समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। रक्षा के क्षेत्र में कमजोरी का फायदा उठाकर चीन मलेशिया की सीमाओं का अतिक्रमण करता रहता है। मलेशिया की सेना के मजबूत होने से चीन की दादागिरी पर अंकुश लगेगा, साथ ही भारत का प्रभाव ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा।