वैश्विक बाजारों में व्यापक बिकवाली और अमरीकी टैरिफ बढ़ाये जाने की आशंका के बीच बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में लगातार चौथे दिन गिरावट आई। सेंसेक्स 780 अंक लुढक़ गया जबकि निफ्टी 264 अंक टूटकर 26,000 के नीचे आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार धातु, तेल, गैस और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर निकासी ने बाजार पर दबाव बनाये रखा। पिछले चार दिनों में सेंसेक्स में लगभग 1600 अंकों की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स की गिरावट के साथ 25,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया है। शेयर मार्केट में इस गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप 7.19 लाख करोड़ रुपए घटकर 474 करोड़ लाख करोड़ रुपए रह गया है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों का सात लाख करोड़ रुपए पिछले सात दिनों में स्वाहा हो गया है। भू-राजनीतिक तनाव, अमरीकी टैरिफ का डर और घरेलू विकास दर को लेकर ङ्क्षचताओं ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। बाजार में घबराहट का प्रथम कारण अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी को लेकर है। ट्रंप ने रूसी तेल मंगाने को लेकर भारत पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप के इस बयान के बाद रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर दबाव बढ़ गया है। अमरीका एक ऐसा विधेयक लाने पर विचार कर रहा है जो रूसी तेल आयात पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकता है। इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ भी हो सकता है। अमरीका भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है। वैश्विक मोर्चे पर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमरीकी सेना द्वारा हिरासत में लिये जाने के बाद भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है। जिसका सीधा असर कमोडिटी तथा तेल बाजारों पर पडऩे की आशंका है। एशियाई बाजारों में भी शेयर बाजार में कमजोरी का रुख रहा। वर्तमान स्थिति में शेयर बाजार अभी दिशाहीन स्थिति में है। तकनीकी रूप से बाजार में कमजोरी आने से बिकवाली दबाव और बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में निवेशकों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। घरेलू मोर्चेे पर आॢथक वृद्धि को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। लेकिन कुछ एजेंसियों का मानना है कि विकास दर और धीमी हो सकती है। अमरीकी टैरिफ बढऩे से निर्यात पर प्रभाव पड़ सकता है। बाजार की इस गिरावट की अगुवाई हैवीवेट स्टोक्स कर रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों में भारी बिकवाली देखी गई है। इन दोनों के शेयर 4 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन शेयरों में गिरावट फंडामेंटल कारणों से ज्यादा तकनीकी तथा सेटलमेंट गतिविधियों से प्रेरित है। रिटेल दिग्गज ट्रेंट के शेयरों में भी बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा के कारण दबाव देखा गया है। अमरीका द्वारा अपनी अर्थ-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुनिया भर के देशों पर जो टैरिफ लगाये जा रहे हैं उसका असर अमरीका पर भी पड़ रहा है। अमरीका जाने वाले सामानों पर ज्यादा टैरिफ लगने से वहां भी महंगाई बढ़ रही है, जिससे वहां की जनता परेशान है। लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी जिद्द के कारण जनता की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। दक्षिण अमरीकी देश वेनेजुएला के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी तेल जहाज को लेकर अमरीका और रूस के बीच बढ़ता तनाव शेयर बाजार को प्रभावित कर रहा है। अमरीका ने एक रूसी जहाज को अपने कब्जे में लिया है जिसको छुड़ाने के लिए रूस की परमाणु पनडुब्बी तथा युद्धपोत अटलांटिक महासागर पहुंच चुके हैं। एक चिंगारी तीसरे महायुद्ध को दावत दे सकती है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ दुनिया के देश इक_े हो रहे हैं जो विश्व के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं। विश्व का वर्तमान माहौल दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है।