बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद वहां रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय खासकर ङ्क्षहदू कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। वैसे तो बांग्लादेश में कई दशकों से ङ्क्षहदुओं पर हमले हो रहे हैं, जिसका नतीजा यह हुआ है कि बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं की आबादी 22 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत के नीचे आ गई है। शेख हसीना के शासन में ङ्क्षहदुओं पर हो रहे हमले के खिलाफ कार्रवाई भी होती थी, किंतु यूनुस के शासन में कट्टरपंथी बेलगाम व बेकाबू हो गये हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता यूनुस कट्टरपंथियों के पोस्टरब्वाय बन गये हैं। चौतरफा दबाव के बाद बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव की घोषणा हुई है। मोहम्मद यूनुस नहीं चाहते हैं कि बांग्लादेश में चुनाव हो, क्योंकि चुनाव के बाद सत्ता उनके हाथ से निकल जाएगी। भारत विरोधी भावनाओं को भडक़ाकर यूनुस कट्टरपंथियों को हवा दे रहे हैं, ताकि अशांत माहौल के कारण चुनाव स्थगित हो जाए। कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की हत्या का आरोप भारत पर लगाकर यूनुस बड़ी साजिश रचने में लगे थे, ङ्क्षकतु बांग्लादेश की जांच एजेंसियों ने सच्चाई से पर्दा हटा दिया। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं, उनके घरों, धाॢमक स्थलों पर लगातार हमले हो रहे हैं। अब तक तीन ङ्क्षहदुओं की हत्या कट्टरपंथियों के हाथों हो चुकी है, जबकि बांग्लादेश प्रशासन मूकदर्शक बनकर कार्रवाई करने की जगह लीपापोती कर रहा है। बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं के घरों में आग लगाये जा रहे हैं, जबकि प्रशासन केवल तमाशाबीन बना हुआ है। बांग्लादेश के चटगांव में इसी हफ्ते कुछ बैनर मिले हैं जिसमें फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले दो लाख ङ्क्षहदुओं के मारने की बात कही गई है। जिस तरह ङ्क्षहदुओं पर हमले हो रहे हैं उससे लगता है कि कट्टरपंथी ङ्क्षहदुओं को हमेशा के लिए खत्म करने पर लगे हुए हैं। ङ्क्षहदुओं पर बढ़ती ङ्क्षहसा को देखते हुए भारत में जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। ङ्क्षहदुओं के समर्थन में आम जनता एवं साधु-संतों ने बांग्लादेशी उच्चायोग के बाहर भारी प्रदर्शन किया। विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाने को कहा है। लेकिन भारत विरोध की सनक में डूबी यूनुस सरकार को बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं के साथ होने वाली लींङ्क्षचग एवं हत्या दिखाई नहीं दे रही है। यूनुस सरकार के सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने वाले हमलों की संख्या 2900 तक पहुंच गई है। ईशङ्क्षनदा के नाम पर ङ्क्षहदुओं पर हमले हो रहे हैं। पिछले जून से दिसंबर तक फर्जी ईशनिंदा की 71 घटनाएं हो चुकी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अमरीका, यूरोपीय देशों तथा मानवाधिकार संगठनों को बांग्लादेश में हो रही घटनाओं की कोई परवाह नहीं है। भारत में होने वाली छोटी-मोटी घटनाओं पर हल्ला मचाने वाले पश्चिमी देशों की आंखों पर पर्दा पड़ गया है। भारत के विपक्षी दल तथा तथाकथिक धर्मनिरपेक्ष शक्तियों के मुंह पर ताले लगे हुए हैं। गाजा के मुद्दे पर हंगामा मचाने वाले लोगों को बांग्लादेश की घटनाएं दिखाई नहीं दे रही हैं। भारत सरकार को बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं पर हो रहे हमले को लेकर कड़ा रुख अपनाना चाहिए। भोजन, बिजली तथा पानी सहित मूलभूत सुविधाओं के लिए भारत पर आश्रित बांग्लादेश पाकिस्तान और चीन की शह पर भारत को आंख दिखा रहा है तथा तोडऩे की धमकी दे रहा है। यूनुस सरकार को अमरीका का भी मौन समर्थन प्राप्त है। भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय साजिश से वाकिफ है। भारत सरकार को सामरिक तथा आॢथक दोनों मोर्चों पर बांग्लादेश पर नकेल कसने की पूरी तैयारी करनी चाहिए। मोदी सरकार ने कुछ शुरूआती कदम उठाये हैं, ङ्क्षकतु वे पर्याप्त नहीं हैं।